Indore Water Tragedy
Indore Water Tragedy: कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी शनिवार को मध्य प्रदेश के इंदौर पहुंचे। उनका यह दौरा मुख्य रूप से शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सांत्वना देने के लिए था। राहुल गांधी ने क्षेत्र का दौरा कर उन परिवारों से मुलाकात की जिन्होंने अपने अपनों को खोया है। इस दौरान उन्होंने मानवीय आधार पर 20 पीड़ित परिवारों को एक-एक लाख रुपये के चेक प्रदान किए, ताकि उन्हें इस कठिन समय में कुछ आर्थिक मदद मिल सके।
भागीरथपुरा में शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद राहुल गांधी निजी क्षेत्र के बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे। यहाँ उन्होंने उन मरीजों से बातचीत की जो दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त और संक्रमण की चपेट में आने के बाद भर्ती किए गए हैं। राहुल गांधी ने डॉक्टरों से भी मरीजों के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी ली। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अस्पताल में अभी भी कई मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और प्रशासन इस मामले की गंभीरता को स्वीकार नहीं कर रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने दावा किया कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के सेवन से अब तक 24 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 10 अन्य मरीजों की हालत अत्यंत गंभीर है। पटवारी ने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे इस समस्या के समाधान के लिए पर्यावरणविदों और पार्षदों का एक सम्मेलन आयोजित करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़गी नहीं और भविष्य में यह सम्मेलन जरूर होगा।
जीतू पटवारी ने राज्य की भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान में ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ वाली स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब शहर के लोग दूषित पानी से मर रहे हैं, तब सरकार के मंत्री भव्य आयोजनों और उत्सवों में व्यस्त हैं। पटवारी ने दावा किया कि पूरे मध्य प्रदेश में 70 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है और यह ‘धीमे जहर’ की तरह काम कर रहा है, जिससे लोगों के गुर्दे (किडनी) और अन्य अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए इसे आम जनता की जान से खिलवाड़ बताया।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर के अंत में शुरू हुआ यह संकट अब कानूनी मोड़ भी ले चुका है। गुरुवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में केवल 7 मौतों का जिक्र किया गया है, जिसमें एक पांच माह का बच्चा भी शामिल है। हालांकि, शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट कुछ और ही इशारा कर रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 15 लोगों की मृत्यु का सीधा या परोक्ष संबंध इस जल जनित प्रकोप से हो सकता है। आंकड़ों का यह अंतर प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
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