Insulin Resistance
Insulin Resistance: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती जीवनशैली के बीच ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ (Insulin Resistance) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरी है। सरल शब्दों में कहें तो, यह वह स्थिति है जब हमारे शरीर की कोशिकाएं (cells) इंसुलिन हार्मोन के प्रति अपनी संवेदनशीलता खो देती हैं और इसके संकेतों पर सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं। इंसुलिन का मुख्य कार्य रक्त में मौजूद शुगर (ग्लूकोज) को नियंत्रित करना और उसे ऊर्जा के लिए कोशिकाओं तक पहुंचाना है। जब कोशिकाएं इस हार्मोन को नजरअंदाज करने लगती हैं, तो ग्लूकोज रक्त में ही जमा होने लगता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है। यह स्थिति मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है और भविष्य में कई गंभीर रोगों की नींव रखती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस होने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इसमें सबसे प्रमुख है गलत खान-पान, जिसमें अत्यधिक मात्रा में प्रोसेस्ड शुगर और सैचुरेटेड फैट का सेवन शामिल है। शारीरिक सक्रियता की कमी, अत्यधिक तनाव और नींद का पूरा न होना भी शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को खराब करते हैं। इसके अलावा, मोटापा—विशेषकर पेट के आसपास जमा चर्बी (Visceral Fat)—इंसुलिन रेजिस्टेंस का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। आनुवंशिक कारण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं; यदि परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम रहा है, तो खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में पीसीओएस (PCOS) जैसी स्थितियां भी इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं।
आरएमएल हॉस्पिटल (RML Hospital) में मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस को लंबे समय तक अनदेखा करना जानलेवा हो सकता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह सबसे पहले टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) में तब्दील हो जाता है। डॉ. गिरि बताते हैं कि इसके कारण शरीर में ‘क्रोनिक इन्फ्लेमेशन’ यानी अंदरूनी सूजन बढ़ जाती है, जिससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) और कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यह न केवल शरीर की ऊर्जा को कम करता है, बल्कि पूरे मेटाबॉलिक तंत्र को तहस-नहस कर सकता है, जिससे थकान और सुस्ती बनी रहती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस के शुरुआती लक्षण इतने सूक्ष्म होते हैं कि लोग अक्सर इन्हें सामान्य थकान समझकर टाल देते हैं। इसके मुख्य संकेतों में बार-बार भूख लगना, विशेष रूप से मीठा (Sugar Cravings) खाने की तीव्र इच्छा होना और पर्याप्त आराम के बावजूद जल्दी थक जाना शामिल है। पेट के हिस्से में अचानक वजन बढ़ना और कमर का घेरा चौड़ा होना इसका एक स्पष्ट संकेत है। कुछ मामलों में, गर्दन के पीछे या बगल (underarms) की त्वचा का रंग गहरा होना या वहां काले धब्बे (Acanthosis Nigricans) पड़ना भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की ओर इशारा करता है। यदि ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत ब्लड टेस्ट के जरिए इंसुलिन लेवल की जांच करानी चाहिए।
राहत की बात यह है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस को सही खान-पान और सक्रिय जीवनशैली के जरिए रिवर्स या कंट्रोल किया जा सकता है। अपनी डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और चीनी को कम करें और फाइबर युक्त भोजन जैसे हरी सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट की शारीरिक कसरत या तेज वॉक इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने में जादुई असर दिखाती है। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है; तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें। याद रखें, वजन पर नियंत्रण और समय-समय पर डॉक्टरी जांच आपको भविष्य की बड़ी बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।
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