Dhanyamalini facts: दशहरा के पर्व पर रावण का पुतला जलाना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। रामायण में रावण, उसकी पत्नी मंदोदरी और पुत्र मेघनाद के नाम तो प्रसिद्ध हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण की एक और पत्नी थी, जिनका नाम था धन्यमालिनी (या दम्यमालिनी)? इस लेख में हम रावण की दूसरी पत्नी धन्यमालिनी और उनके पुत्रों के बारे में जानेंगे।
धन्यमालिनी, रावण की दूसरी पत्नी थीं। वे मंदोदरी की छोटी बहन थीं और दोनों मय दानव की पुत्रियाँ थीं। मंदोदरी रावण की पटरानी थीं, जबकि धन्यमालिनी को रावण ने दूसरी पत्नी के रूप में माना। धर्मशास्त्रों में उनके नाम दम्यमालिनी और धन्यमालिनी दोनों से उल्लेख मिलता है। दोनों बहनें विष्णु भगवान की भक्त थीं, लेकिन रावण से विवाह के बाद दोनों ने विष्णु की भक्ति छोड़ दी।
धन्यमालिनी सोने की लंका में रहती थीं, जहां उन्हें रावण ने पूरा सम्मान दिया। वह रावण की प्रमुख राक्षस पत्नियों में से एक थीं।
रावण के धन्यमालिनी से चार पुत्र थे, जिनके नाम थे:
अतिकाय
नरांतक
त्रिशिरा
देवांतक
अतिकाय — अतिकाय रावण के पुत्रों में सबसे शक्तिशाली थे। उन्होंने भगवान ब्रह्मा से ब्रह्म कवच और अन्य दिव्य अस्त्र प्राप्त किए थे। वे एक अत्यंत बलशाली योद्धा थे, जिन्हें केवल ब्रह्मास्त्र से मारा जा सकता था। राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने इस भयंकर योद्धा का वध किया था। लक्ष्मण ने हनुमान के कंधे पर बैठकर युद्ध किया और ब्रह्मास्त्र के द्वारा अतिकाय का संहार किया।
नरांतक और देवांतक — दोनों पुत्रों का वध अंगद ने युद्ध के दौरान किया था। वे भी रावण के मजबूत सेनापतियों में से थे, लेकिन अंगद के प्रहारों के सामने वे टिक नहीं सके।
त्रिशिरा — त्रिशिरा का वध हनुमान ने अपनी गदा से किया था। वे एक भयंकर दैत्य योद्धा थे, जिनका सिर हनुमान ने युद्ध में अलग कर दिया था।
रावण के कुल आठ भाई-बहन थे, जिनमें प्रसिद्ध नाम हैं कुंभकर्ण, विभीषण, अहिरावण, खर, दूषण, शूर्पनखा और कुंभिनी। रावण का सौतेला भाई कुबेर भी था, जिन्हें धन के देवता के रूप में पूजा जाता है।
मंदोदरी और धन्यमालिनी के दो भाई मायावी और दुदुंभी थे, जिनका वध वानरराज बालि ने किया था।
रावण के पिता महर्षि विश्वश्रवा और माता का नाम कैकसी था। उनके दादा महर्षि पुलस्त्य भगवान ब्रह्मा के पुत्र थे। रावण के नाना सुमाली और नानी ताड़का थी, जिनका उल्लेख भी रामायण में मिलता है।
रावण की दूसरी पत्नी धन्यमालिनी और उनके चार पुत्रों का नाम रामायण में कम ही सुना जाता है, परंतु वे भी राम-रावण युद्ध के महत्वपूर्ण योद्धा थे। अतिकाय, नरांतक, त्रिशिरा और देवांतक की वीरता का वर्णन वाल्मीकि रामायण और अन्य पुराणों में मिलता है। दशहरा के पावन अवसर पर हमें रावण के इस विस्तृत परिवार और उनकी कथा को भी याद रखना चाहिए।
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