IPAC Raid Row
IPAC Raid Row: पश्चिम बंगाल में आई-पैक (I-PAC) के ठिकानों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान हुए हंगामे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला तब गरमाया जब ईडी ने आरोप लगाया कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व और पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी की वैधानिक जांच में न केवल बाधा डाली, बल्कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ भी की।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में बेहद चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि जब ईडी पीएमएलए (PMLA) की धारा 17 के तहत तलाशी ले रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी पुलिस बल के साथ अवैध रूप से परिसर में दाखिल हुईं। मेहता ने आरोप लगाया कि सीएम और पुलिस अधिकारियों ने जांच दल को धमकाया, उनके फोन छीन लिए और तीन अत्यंत संवेदनशील दस्तावेजों सहित कई डिजिटल डिवाइस अपने साथ ले गईं। उन्होंने इसे संवैधानिक मशीनरी की विफलता बताते हुए कहा कि अगर राज्य सरकारें इसी तरह केंद्रीय जांच में दखल देंगी, तो केंद्रीय बलों का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा।
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कलकत्ता हाईकोर्ट में हुए व्यवधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि टीएमसी की लीगल सेल ने सुनियोजित तरीके से कोर्ट परिसर को ‘जंतर-मंतर’ में बदल दिया था ताकि ईडी के वकीलों को बहस न करने दी जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसजी का माइक बार-बार म्यूट किया गया और भीड़ जमा करके न्यायाधीशों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस बात से “व्यथित” है कि एक उच्च न्यायालय को अपना न्यायिक कार्य करने से रोका गया। मेहता ने मांग की कि दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए जाएं।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी ने पक्ष रखा। सिब्बल ने ईडी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ममता बनर्जी केवल अपना निजी लैपटॉप और आईफोन लेकर गई थीं, क्योंकि उनमें चुनावी और पार्टी से जुड़ी गोपनीय जानकारी थी। सिब्बल ने कहा कि ईडी का आई-पैक के दफ्तर जाना ही दुर्भावनापूर्ण था क्योंकि वहां केवल पार्टी की प्रचार सामग्री थी। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश करार देते हुए कहा कि पंचनामा और ईडी की याचिका के तथ्यों में भारी विरोधाभास है।
सॉलिसिटर जनरल ने पीएमएलए की धारा 54 का हवाला देते हुए कहा कि जो भी अधिकारी जांच में बाधा डालते हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिसाल कायम करने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) और DoPT को इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश देना जरूरी है। मेहता ने कोर्ट में टीएमसी के व्हाट्सएप ग्रुप के उन संदेशों को भी पढ़ा, जिनमें कार्यकर्ताओं को कोर्ट पहुंचने के लिए उकसाया गया था। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘अत्यंत गंभीर’ माना है। अब 15 दिन बाद होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी होंगी कि क्या सुप्रीम कोर्ट बंगाल के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम उठाता है।
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