IPAC Raid
IPAC Raid: पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार के बीच जारी खींचतान अब उच्चतम न्यायालय की दहलीज पर पहुँच गई है। गुरुवार को होने वाली अहम सुनवाई से ठीक पहले केंद्रीय एजेंसी ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई और बेहद सख्त अर्जी दाखिल की है। इस याचिका में पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की गई है। ईडी का आरोप है कि राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का आचरण न केवल पक्षपातपूर्ण है, बल्कि वे केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के बजाय जांच में रोड़े अटका रहे हैं।
यह पूरा मामला 8 जनवरी को टीएमसी के आईटी हेड और पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म (I-PAC) के डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जब तलाशी चल रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुँचीं और जांच प्रक्रिया में बाधा डाली। एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद पुलिस अधिकारियों ने अहम फाइलें और दस्तावेज जबरन छीन लिए। ईडी ने अपनी अर्जी में मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारियों पर डकैती, लूट, चोरी, सरकारी कार्य में बाधा डालने और साक्ष्यों को नष्ट करने जैसे कुल 17 गंभीर अपराधों का आरोप लगाया है।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और केंद्रीय गृह मंत्रालय को बंगाल के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दे। याचिका में यह भी कहा गया है कि छापेमारी के बाद बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों को डराने के उद्देश्य से उनके खिलाफ कई फर्जी एफआईआर दर्ज की हैं। एजेंसी चाहती है कि इन सभी एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपी जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे। साथ ही, ईडी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री द्वारा ले जाए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को तुरंत जब्त कर सील किया जाए।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि प्रतीक जैन के आवास और आई-पैक कार्यालय से जो सबूत इकट्ठा किए जा रहे थे, उनका किसी राजनीतिक दल की सामान्य गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था। एजेंसी का दावा है कि ये दस्तावेज ‘अवैध कोयला खनन घोटाले’ की करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े थे। याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और पुलिस ने मिलकर जांच को कमजोर करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया है। यह न केवल कानून के शासन का अपमान है, बल्कि संविधान की मर्यादाओं के खिलाफ भी है।
याचिका में ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में हुई घटनाओं का भी जिक्र किया है। एजेंसी के मुताबिक, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सत्तारूढ़ दल के समर्थकों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भीड़ इकट्ठा कर हंगामा किया, जिससे कार्यवाही टालनी पड़ी। इसी कारण ईडी ने अब सुप्रीम कोर्ट से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले ही केविएट दाखिल कर दी है, ताकि उनका पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश पारित न हो। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर फैसला लेगी।
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