US-Iran tension
US-Iran tension: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध अब सूचना युद्ध (Information War) के स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में ईरान की ओर से किए गए एक सनसनीखेज दावे ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने दावा किया है कि ईरानी बलों ने युद्ध के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों को बंदी बना लिया है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल ईरानी प्रोपेगैंडा करार दिया है। दोनों देशों के बीच जारी इस जुबानी जंग ने मिडिल ईस्ट के तनाव को और अधिक गहरा कर दिया है।
ईरानी नेता अली लारीजानी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ (X) पर एक विवादास्पद पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्हें मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, कई अमेरिकी सैनिक इस समय ईरान की कैद में हैं। लारीजानी ने अमेरिकी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन इन सैनिकों को ‘एक्शन में मारे गए’ (Killed in Action) बताकर अपनी जनता से सच छिपा रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका की यह कोशिश बेकार जाएगी क्योंकि सच्चाई को अधिक समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता। इस बयान ने अमेरिका के भीतर भी चिंता और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है।
ईरानी दावों के तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थिति स्पष्ट की। अल जजीरा से बातचीत करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि ईरान का यह दावा कि अमेरिकी सैनिकों को पकड़ा गया है, केवल झूठ और धूर्तता का एक उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना का कोई भी जवान लापता या बंदी नहीं है। प्रवक्ता ने यह भी स्वीकार किया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक उनके 6 सैनिक मारे गए हैं। ये मौतें कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर हुए ईरानी हमलों के दौरान हुई थीं, जिन्हें अमेरिका ने पहले ही सार्वजनिक कर दिया था।
युद्ध के आठवें दिन भी बमबारी का सिलसिला नहीं थमा। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में मरने वालों की संख्या 1,332 तक पहुंच गई है। सबसे हृदयविदारक घटना दक्षिण-पूर्वी शहर मिनाब में हुई, जहां एक स्कूल पर हुए हमले में 180 बच्चों की जान चली गई। इस हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नरसंहार के लिए ईरान को ही जिम्मेदार ठहराया है, वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स के एक विश्लेषण ने चौंकाने वाला दावा किया है कि यह हमला संभवतः अमेरिकी सेना द्वारा किया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि उनकी खुफिया जानकारी के अनुसार स्कूल पर हमला ईरान ने ही किया है। हालांकि, परस्पर विरोधी दावों और बढ़ती मौतों ने स्थिति को अत्यंत जटिल बना दिया है। अमेरिका और इजरायल की ईरान पर लगातार जारी बमबारी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है, हताहतों की संख्या और दोनों देशों के बीच की नफरत वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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