Iran Crisis
Iran Crisis: ईरान में लगभग एक सप्ताह पहले शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन नए साल 2026 के आगमन के साथ ही अत्यंत हिंसक और घातक हो गया है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों ने इस बात की पुष्टि की है कि सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम छह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। गुरुवार को नए साल के जश्न के समय प्रदर्शनों की आग ईरान के ग्रामीण इलाकों तक फैल गई, जिससे पूरा देश अराजकता की चपेट में आ गया है। तेहरान के पश्चिमी इलाकों में शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी की भी खबर है।
ईरान से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा की सबसे भयानक तस्वीरें उन शहरों से सामने आई हैं जहां मुख्य रूप से ‘लूर’ जातीय समूह के लोग रहते हैं। सबसे ज्यादा खून-खराबा तेहरान से 300 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित ‘अजना’ शहर में हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में सड़कों पर टायर जलते हुए और गोलियों की तड़तड़ाहट साफ सुनी जा सकती है। लोरेदेगान, कुहदाश्त और इस्फहान प्रांतों में भी मौतों की पुष्टि हुई है। अर्धसरकारी न्यूज़ एजेंसी ‘फार्स’ ने रिपोर्ट दी है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
इस विरोध प्रदर्शन का स्वरूप केवल आर्थिक न रहकर अब राजनीतिक होता जा रहा है। तेहरान विश्वविद्यालय के छात्र सड़कों पर उतरकर ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा 1979 की इस्लामिक क्रांति में अपदस्थ किए गए दिवंगत शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे, रजा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगाए गए। अमेरिका में निर्वासित जीवन बिता रहे रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक वर्तमान सरकार सत्ता में है, देश की आर्थिक स्थिति कभी नहीं सुधरेगी। उन्होंने जनता से एकजुट रहने की अपील करते हुए अपनी जीत का भरोसा जताया है।
ईरान में वर्तमान विरोध प्रदर्शन पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़े माने जा रहे हैं। इससे पहले 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद देशभर में आक्रोश देखा गया था। वर्तमान असंतोष का मुख्य कारण बेतहाशा बढ़ती महंगाई है। दिसंबर में महंगाई दर 42.5% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे आम जनता का जीवन दूभर हो गया है। जून में इजरायल के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध और अमेरिकी बमबारी ने देश के बुनियादी ढांचे और मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है, जिसका गुस्सा अब सड़कों पर फूट रहा है।
ईरान का धार्मिक नेतृत्व इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए सख्त आर्थिक प्रतिबंधों ने देश की कमर तोड़ दी है। परमाणु स्थलों पर हुई बमबारी और युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जनता का मानना है कि सरकार की नीतियां देश को गर्त में धकेल रही हैं। सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच यह संघर्ष न केवल ईरान की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।ॉ
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