Iran vs Arab States UN
Iran vs Arab States : मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे होते जा रहे हैं। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब पांच पड़ोसी अरब देशों—सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन और जॉर्डन—के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ईरान का दावा है कि इन देशों ने अपनी धरती का उपयोग ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियानों के लिए होने दिया है।ईरानी सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।
इस पत्र में ईरान ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि जिन अरब देशों ने अपनी जमीन पर अमेरिकी और इजरायली सैन्य गतिविधियों को अनुमति दी, वे अब मासूम नहीं रह गए हैं। ईरान ने इन देशों द्वारा किए गए किसी भी प्रकार के ‘आत्मरक्षा’ (यूएन चार्टर अनुच्छेद 51) के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ईरान ने अपने पत्र में बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर आरोप लगाया है कि वे न केवल मूकदर्शक रहे, बल्कि कुछ मामलों में सीधे तौर पर ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों में सहभागी बने। ईरान का तर्क है कि जब कोई देश अपनी संप्रभु भूमि का उपयोग किसी दूसरे देश पर हमले के लिए करने देता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उस हमले का भागीदार माना जाता है। ईरान ने मांग की है कि ये देश तत्काल प्रभाव से अपनी जमीन का ‘दुरुपयोग’ बंद करें।
ईरान ने पहली बार इन पांचों देशों से ‘पूर्ण भरपाई’ (Full Reparation) की मांग की है। तेहरान के अनुसार, इन हमलों से ईरान को जो आर्थिक और भौतिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई तो होनी ही चाहिए, साथ ही ‘नैतिक नुकसान’ (Moral Damage) के लिए भी ये देश जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए ईरान ने कहा है कि इन देशों को अपनी गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी और भविष्य में ऐसे किसी भी उकसावे से बचना होगा।
पड़ोसी देशों के साथ-साथ ईरान ने अमेरिका पर भी तीखा हमला बोला है। ईरान ने एक अलग पत्र में आरोप लगाया कि 12 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की अवैध नौसैनिक नाकेबंदी शुरू की है। ईरान के अनुसार, यह कदम यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग को प्रतिबंधित करता है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और वैध व्यापार के अधिकारों का हनन है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए ‘जरूरी और उचित कदम’ उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। ईरान ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो इसके गंभीर परिणाम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति पर पड़ेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वाशिंगटन की होगी।
Read More : SC on Right to Vote: वोट देना देशभक्ति और संवैधानिक हक’, सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने बदला चुनावी समीकरण!
Women's Reservation: महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर माने जाने वाले 'नारी शक्ति…
Trump Last Warning : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब अपने सबसे…
Kawardha News: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई…
ECI Update: भारत के कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर है।…
Iran News: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर…
Iran Military Update: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे दो हफ्तों के नाजुक संघर्ष…
This website uses cookies.