Ambedkar Jayanti 2026
Ambedkar Jayanti 2026: संविधान निर्माता डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर भारत की संसद में एक दुर्लभ और सकारात्मक दृश्य देखने को मिला। मंगलवार सुबह जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और विपक्षी दलों के नेता बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देने संसद भवन स्थित ‘प्रेरणा स्थल’ पहुंचे, तो वहां का माहौल काफी गरिमामय था। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच संक्षिप्त लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। चुनावी गहमागहमी के बीच दोनों शीर्ष नेताओं के बीच हुई इस बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं।
सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने इस अनौपचारिक मुलाकात का उपयोग एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए किया। पीएम मोदी ने मल्लिकार्जुन खड़गे से आग्रह किया कि सरकार महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संसद में एक नया संशोधन विधेयक लाने जा रही है, जिसका विपक्ष को दिल खोलकर समर्थन करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार द्वारा लाया जा रहा यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके व्यापक हित में है, और इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री की इस अपील पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तत्काल कोई वादा करने के बजाय एक मंझे हुए राजनेता की तरह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर अपनी पार्टी के सहयोगियों और अन्य विपक्षी दलों के साथ चर्चा करेंगे, जिसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का एक विशेष सत्र बुलाया है। माना जा रहा है कि इस तीन दिवसीय सत्र का मुख्य एजेंडा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करना और आवश्यक संशोधनों को पारित कराना है।
केंद्र सरकार की योजना साल 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह जमीन पर उतारने की है। इस कानून के तहत लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी इस सिलसिले में विपक्ष से निरंतर संवाद कर रहे हैं ताकि इस ऐतिहासिक सुधार में देरी न हो। सरकार चाहती है कि परिसीमन और अन्य तकनीकी संशोधनों पर सभी दलों के बीच एक राय बने, ताकि भारतीय लोकतंत्र के इस क्रांतिकारी बदलाव को बिना किसी विघ्न के लागू किया जा सके।
आज पूरा देश भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती को उत्सव के रूप में मना रहा है। 14 अप्रैल 1891 को जन्मे बाबासाहेब का जीवन संघर्ष और ज्ञान की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने उस दौर में छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों के खिलाफ जंग लड़ी, जब समाज गहरे अंधकार में डूबा था। भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार के रूप में उन्होंने न केवल दलितों और पिछड़ों को उनका अधिकार दिलाया, बल्कि एक ऐसे भारत की नींव रखी जहां कानून की नजर में हर नागरिक बराबर हो। उनकी जयंती पर आज संसद से लेकर गांव-गांव तक उनके न्यायपूर्ण भारत के सपने को साकार करने का संकल्प लिया जा रहा है।
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