Middle East War 2026
Middle East War 2026: मिडिल ईस्ट में युद्ध की लपटें बुझने का नाम नहीं ले रही हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इस बीच, तेहरान ने वाशिंगटन को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी जारी की है। ईरान के शीर्ष अधिकारी मोहसेन रजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर आगाह किया है कि समय तेजी से निकल रहा है और अमेरिका को इस “युद्ध के दलदल” से बाहर निकलने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।
ईरान के प्रभावशाली नेता मोहसेन रजाई ने एक विशेष इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी सेना ने ईरान के बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से ऊर्जा और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, तो ईरान का पलटवार उम्मीद से कहीं अधिक भीषण होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अब मुकाबला “आंख के बदले आंख” का नहीं, बल्कि “आंख के बदले सिर” का होगा। रजाई का दावा है कि ईरान के पास ऐसी सामरिक शक्ति है जो न केवल अमेरिकी हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिका की स्थिति को पूरी तरह अस्थिर करने में सक्षम है।
हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका अगले पांच दिनों तक ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा संयंत्रों पर हमला नहीं करेगा। हालांकि, तेहरान ने इस कथित “उदारता” को सिरे से खारिज कर दिया है। मोहसेन रजाई ने इसे शांति की पहल मानने के बजाय अमेरिका का “मनोवैज्ञानिक युद्ध” (Psychological Warfare) करार दिया। उनके अनुसार, अमेरिका विरोधाभासी बयान देकर ईरान का ध्यान भटकाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान इन कूटनीतिक चालों में नहीं फंसने वाला।
इंटरव्यू के दौरान रजाई ने संघर्ष विराम के लिए तीन स्पष्ट और कड़ी शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान को हुए नुकसान की भरपाई नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा। उनकी पहली शर्त है कि युद्ध में हुए जान-माल के नुकसान का पूरा आर्थिक मुआवजा दिया जाए। दूसरी, ईरान पर लगाए गए सभी अंतरराष्ट्रीय और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। और तीसरी, अमेरिका लिखित रूप में यह गारंटी दे कि वह भविष्य में कभी भी ईरान के आंतरिक और संप्रभु मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
क्षेत्रीय स्तर पर युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान ने हाथ आगे बढ़ाया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया के माध्यम से अमेरिका और ईरान दोनों को इस्लामाबाद में वार्ता की मेज पर आने का निमंत्रण दिया है। पाकिस्तान का मानना है कि इस वैश्विक संकट का समाधान केवल कूटनीति से ही संभव है। हालांकि, ईरान ने इस पर अभी कोई आधिकारिक सहमति नहीं दी है, लेकिन यह प्रस्ताव मध्य पूर्व में शांति की एक क्षीण उम्मीद जगाता है।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेतृत्व के साथ “सकारात्मक बातचीत” के दावों को तेहरान ने पूरी तरह “फेक न्यूज” करार दिया है। ईरान का मानना है कि ट्रंप इस तरह के झूठे बयान सिर्फ वैश्विक तेल बाजार और शेयर मार्केट को स्थिर करने के लिए दे रहे हैं। तेहरान ने स्पष्ट किया कि धरातल पर अभी तक कोई वास्तविक कूटनीतिक प्रगति नहीं हुई है और जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, किसी भी प्रकार के समझौते की गुंजाइश नहीं है।
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