US-Iran War
US-Iran War : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ “सार्थक बातचीत” के दावों को ईरानी सेना ने सिरे से खारिज करते हुए इसे एक अंतरराष्ट्रीय प्रहसन करार दिया है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच जुबानी जंग अब और तेज हो गई है, जिससे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में शांति की कोशिशों को गहरा झटका लगा है।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया था कि ईरान के साथ पिछले दो दिनों से “बहुत अच्छी और सकारात्मक” बातचीत हुई है। इसी आधार पर ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका अगले पांच दिनों तक ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा। हालांकि, ईरानी सेना ने इस दावे को महज एकतरफा कल्पना बताया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फागरी ने बुधवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका जिसे “सार्थक संवाद” कह रहा है, वह असल में “अमेरिका की खुद से की जा रही बातचीत” के अलावा कुछ नहीं है।
सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक रिकॉर्डेड संदेश में लेफ्टिनेंट कर्नल जोल्फागरी ने अमेरिका की वैश्विक स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो देश खुद को दुनिया की एकमात्र महाशक्ति मानता था, उसकी “रणनीतिक शक्ति” अब “रणनीतिक विफलता” में बदल चुकी है। जोल्फागरी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर अमेरिका इस दलदल से बाहर निकलने में सक्षम होता, तो वह अब तक निकल चुका होता। उन्होंने वाशिंगटन को चेतावनी दी कि वे अपनी हार को ‘समझौते’ का नाम देकर छिपाने की कोशिश न करें, क्योंकि खोखले वादों का दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15 सूत्री युद्धविराम प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद जोल्फागरी ने कड़े लहजे में कहा, “हमारा रुख पहले दिन से स्पष्ट है। हमारे जैसे लोग आपके (अमेरिका) जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।” ईरान के इस अडिग रवैये ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बीच, चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने और मसले को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की अपील की है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर न पड़े।
ईरान-अमेरिका तनाव का सीधा असर इजरायल और लेबनान की सीमाओं पर भी देखने को मिल रहा है। ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, हिजबुल्लाह द्वारा संभावित बड़े हमले की आशंका के चलते सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई शहरों में रॉकेट और संदिग्ध ड्रोन अलर्ट के सायरन बजाए गए, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों (बंकर्स) में जाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि इजरायली सुरक्षा बल स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र मध्य पूर्व में शांति बहाली और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित और खुला रखना था। भारत की इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका को देखते हुए यह वार्ता बेहद अहम मानी जा रही है। ट्रंप चाहते हैं कि भारत जैसे प्रभावशाली देश इस तनाव को कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाएं।
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