Iran Inflation Protests 2026
Iran Inflation Protests 2026: ईरान की राजधानी तेहरान एक बार फिर सत्ता विरोधी लहर की चपेट में है। 30 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ईरान के युवा और छात्र सड़कों पर उतरकर मौजूदा शासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं। इस विद्रोह की मुख्य जड़ आसमान छूती महंगाई और बदहाल अर्थव्यवस्था है। प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के व्यापारियों ने की थी, जिनका कारोबार मुद्रास्फीति के कारण ठप हो गया है, लेकिन अब यह आंदोलन आम जनता और छात्रों के नेतृत्व में पूरे देश में फैल चुका है।
ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वर्तमान में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 42,125 ईरानी रियाल के बराबर हो गई है। देश में महंगाई दर 40% के पार जा चुकी है, जिससे आम आदमी के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। पश्चिमी देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और पिछले वर्ष इजरायली एयरस्ट्राइक के कारण हुए नुकसान ने ईरान की कमर तोड़ दी है।
यह विरोध प्रदर्शन अब केवल तेहरान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिराज, हामेदान और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में भी फैल गया है। ईरान की युवा पीढ़ी यानी ‘जेन-जी’ (Gen Z) इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरी है। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिसिया कार्रवाई और झड़पों में अब तक कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और अधिक भड़क गया है, जिससे स्थिति अनियंत्रित होती जा रही है।
ईरान के आंतरिक हालात पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर को चुनौती दी है। ट्रंप ने लिखा कि यदि ईरानी शासन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है या उन्हें मारता है, तो अमेरिका उनकी सहायता के लिए तैयार है। ट्रंप के इस बयान ने ईरान के साथ-साथ चीन और रूस जैसे देशों की भी चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल भारत ने इस मामले पर अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने जनता से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि अवाम की रोजी-रोटी उनकी प्राथमिकता है और सरकार बैंकिंग सिस्टम में सुधार कर रही है। इसी बीच, भारी दबाव के चलते ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इन बदलावों से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरानी सरकार बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकाल पाएगी या यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ेगा।
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