UN Security Council : संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार को ईरान के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंचा दिया। करीब 20 साल में यह पहली बार है जब IAEA ने ईरान के खिलाफ इस तरह की शिकायत की है। यह कदम उन परमाणु स्थलों से जुड़े सवालों के कारण उठाया गया है, जिन्हें ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया था और जहां यूरेनियम के निशान पाए गए थे।
यूरेनियम के निशानों पर जांच में सहयोग नहीं
पश्चिमी देशों के अधिकारियों को आशंका है कि ईरान में मिले इन यूरेनियम के निशान उसके पुराने गुप्त परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हो सकते हैं। उनका संदेह है कि वर्ष 2003 तक ईरान में परमाणु हथियार विकसित करने से संबंधित गतिविधियां चल रही थीं। हालांकि, ईरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा।
सुरक्षा परिषद में पहुंचने से बढ़ा प्रतिबंधों का खतरा
ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में जाने के बाद उस पर नए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना बन गई है। इसके अलावा उसकी कुछ संपत्तियों को जब्त करने जैसे कदम भी संभव हो सकते हैं। हालांकि, फिलहाल ऐसे कड़े दंडात्मक कदम उठाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि ईरान के प्रमुख सहयोगी रूस और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो पावर मौजूद है।
प्रस्ताव के पक्ष में 23 देशों ने किया मतदान
वियना स्थित IAEA मुख्यालय में बुधवार को 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में प्रस्ताव पर मतदान हुआ। राजनयिकों के मुताबिक 23 देशों ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया। वहीं चीन, रूस और नाइजर ने प्रस्ताव का विरोध किया। आठ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जबकि एक देश बकाया राशि के कारण वोट देने की स्थिति में नहीं था। मतदान बंद कमरे में हुआ और इसकी जानकारी राजनयिक सूत्रों ने दी।
अमेरिका समेत चार देशों ने रखा प्रस्ताव
ईरान के खिलाफ यह प्रस्ताव अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पेश किया था। इस कार्रवाई पर जून 2025 से विचार चल रहा था। उस समय IAEA बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला था कि ईरान जांच में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा है और परमाणु अप्रसार से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने में विफल रहा है। अब मामले को सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने से ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बढ़ा
IAEA की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। इस सप्ताह अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट करने का दावा किया है। इसके जवाब में तेहरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच हमलों का यह नया दौर छह महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष को और जटिल बना रहा है।
IAEA ने ईरान से सहयोग बढ़ाने को कहा
प्रस्ताव में IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से कहा गया है कि वह प्रस्ताव और पहले पारित किए गए संबंधित प्रस्तावों की जानकारी एजेंसी के सभी सदस्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा को दें। इसके साथ ही ईरान से अपने दायित्वों का पालन करने और IAEA के साथ सहयोग बढ़ाने की मांग दोहराई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु सामग्री का गलत इस्तेमाल न हो।
परमाणु ठिकानों तक निरीक्षकों की पहुंच बंद
जून 2025 में इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। करीब 12 दिन चले उस संघर्ष के बाद ईरान ने हमलों से प्रभावित परमाणु स्थलों पर IAEA निरीक्षकों की पहुंच रोक दी। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पा रही है।
ईरान के पास 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम
IAEA के अनुसार ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। यह मात्रा हथियार बनाने के लिए आवश्यक करीब 90 प्रतिशत संवर्धन स्तर से तकनीकी रूप से ज्यादा दूर नहीं मानी जाती। IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि ईरान हथियार बनाने का निर्णय करता है तो मौजूदा भंडार से कई परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि इसका अर्थ यह नहीं है कि ईरान के पास वर्तमान में परमाणु बम मौजूद है।
परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया की नजर
IAEA की शिकायत के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ गई है। एक तरफ तेहरान शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों का दावा करता है, वहीं पश्चिमी देश यूरेनियम के निशानों और निरीक्षण में सहयोग को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब सुरक्षा परिषद में आगे होने वाली चर्चा और ईरान की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर रहेगी।
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