Iran Protests
Iran Protests 2026: ईरान वर्तमान में एक अभूतपूर्व नागरिक अशांति के दौर से गुजर रहा है। पिछले 12 दिनों से देश की चरमराती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ जनता सड़कों पर है। शुरुआत में ये प्रदर्शन छोटे स्तर पर आर्थिक सुधारों की मांग के साथ शुरू हुए थे, लेकिन देखते ही देखते इन्होंने एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले लिया है। समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती झड़पों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे सरकार की कार्रवाई सख्त हो रही है, जनता का गुस्सा और अधिक बढ़ता जा रहा है।
ईरान सरकार ने प्रदर्शनों की आग को दबाने के लिए अब सूचना के प्रवाह पर प्रहार किया है। ऑनलाइन निगरानी संस्था ‘नेटब्लॉक्स’ (NetBlocks) ने रिपोर्ट दी है कि गुरुवार को पूरे ईरान में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। नेटब्लॉक्स ने सोशल मीडिया पर जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि लाइव डेटा स्पष्ट रूप से “राष्ट्रव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट” की पुष्टि करता है। यह कदम प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय को तोड़ने और दुनिया तक ईरान के भीतर की जमीनी हकीकत को पहुंचने से रोकने के लिए उठाया गया है। यह डिजिटल सेंसरशिप का एक चरम उदाहरण है, जिसने करोड़ों लोगों को एक-दूसरे से अलग-थलग कर दिया है।
ईरान के निर्वासित युवराज द्वारा किए गए हालिया आह्वान ने इस आंदोलन में घी का काम किया है। उनके समर्थन में राजधानी तेहरान समेत देश के अन्य प्रमुख हिस्सों में भारी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाहर निकल आए। इसी बढ़ते दबाव को देखते हुए गुरुवार रात सरकार ने न केवल इंटरनेट, बल्कि लैंडलाइन और मोबाइल टेलीफोन लाइनों को भी काट दिया। ‘क्लाउडफ्लेयर’ (Cloudflare) जैसी वैश्विक इंटरनेट बुनियादी ढांचा कंपनियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी पूरी तरह टूट चुकी है, जिसका सीधा कारण सरकारी हस्तक्षेप है।
ईरान की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब वहां से किसी भी प्रकार का संपर्क करना लगभग असंभव हो गया है। दुबई और अन्य अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से ईरान में लैंडलाइन और मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। फोन कॉल कनेक्ट नहीं हो पा रहे हैं, जिससे विदेशों में रह रहे ईरानी नागरिकों के मन में अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर भारी डर बैठ गया है। अधिकारियों द्वारा अपनाया गया यह ‘कम्युनिकेशन शटडाउन’ रणनीति का हिस्सा है ताकि विरोध की आवाजों को दबाया जा सके।
ईरान में चल रहा यह आर्थिक विरोध प्रदर्शन अब केवल रोटी और रोजगार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक राजनीतिक असंतोष में बदल चुका है। इंटरनेट बंद होने से न केवल सूचना का अभाव हुआ है, बल्कि बैंकिंग, व्यापार और आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है, क्योंकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हताहतों की संख्या बढ़ने की खबरें लगातार आ रही हैं। यदि सरकार और जनता के बीच यह गतिरोध समाप्त नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में मानवीय संकट और गहरा सकता है।
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