Iran Protests 2026
Iran Protests 2026: ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में पिछले कुछ दिनों से अशांति का माहौल है। देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन केवल नारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह आंदोलन अब धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता जा रहा है, जिससे ईरानी शासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। सरकार के प्रति जनता का यह गुस्सा दशकों पुरानी व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।
ईरान के भीतर मचे इस घमासान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से खामेनेई सरकार को खुली धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान शांतिपूर्ण विरोध कर रहे अपने ही नागरिकों पर गोलियां चलाता है या उन्हें मारता है, तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में अमेरिका प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए और ईरानी ठिकानों पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के इस बयान ने मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी पर ईरान ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और खामेनेई के करीबी सलाहकार अली लारिजानी ने एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने की हिमाकत नहीं करनी चाहिए। लारिजानी ने चेतावनी दी कि ट्रंप का यह व्यवहार पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और अस्थिरता फैलाने वाला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप को दूसरों के मुद्दों में पड़ने के बजाय क्षेत्र में तैनात अपने सैनिकों की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए।
ईरान के विभिन्न शहरों से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं। अब तक हुई मौतों में लॉर्डेगन में 2 और अजना में 3 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, कुहदाश्त में देर रात हुई झड़प में एक सुरक्षाकर्मी की भी मौत की खबर है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए ईरानी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां कड़े कदम उठा रही हैं। दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि गिरफ्तारियों और मौतों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के बाद यह ईरान का सबसे बड़ा जन आंदोलन है। इस बार विरोध की मुख्य वजह आसमान छूती महंगाई और देश की चरमराती अर्थव्यवस्था है। ईरान की करेंसी में भारी गिरावट और आवश्यक वस्तुओं की कमी ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। सरकार इस असंतोष को दबाने के लिए सख्त रवैया अपना रही है, लेकिन जनता पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही है। अब देखना यह होगा कि क्या यह प्रदर्शन किसी बड़े सत्ता परिवर्तन की ओर ले जाता है या सरकार बल प्रयोग कर इसे दबाने में सफल रहती है।
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