Iran-US Ceasefire Breaking
Iran-US Ceasefire Breaking: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ बहुप्रतीक्षित सीजफायर समझौता लागू होने के महज 24 घंटे के भीतर ही टूटने की कगार पर पहुँच गया है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर आरोप लगाया है कि सीजफायर डील की महत्वपूर्ण शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अभी इस्लामाबाद में स्थायी शांति समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू भी नहीं हुई थी कि उससे पहले ही अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर युद्ध की ओर धकेलने की आशंका पैदा कर दी है।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबफ़ ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जब सीजफायर की 10 प्रमुख शर्तों में से तीन का उल्लंघन पहले ही दिन हो गया है, तो ऐसी स्थिति में न तो इस सीजफायर का कोई औचित्य बचता है और न ही बातचीत का कोई अर्थ है। ग़ालिबफ़ का यह बयान संकेत देता है कि ईरान अब इस समझौते से पीछे हट सकता है। ईरान का मानना है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने बातचीत की मेज पर आने से पहले ही अपनी प्रतिबद्धताओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
ईरान के अनुसार, 10-प्वाइंट प्रस्ताव की सबसे पहली और बुनियादी शर्त लेबनान में तत्काल सीजफायर से जुड़ी थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अपनी मध्यस्थता के दौरान यह स्पष्ट किया था कि समझौता “हर जगह तुरंत सीजफायर” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें लेबनान और अन्य संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, ईरान का आरोप है कि इजरायल ने लेबनान पर अब तक की सबसे भारी बमबारी शुरू कर दी है, जिसे अमेरिका का मौन समर्थन प्राप्त है। ईरान इसे सीधे तौर पर समझौते की पहली शर्त की धज्जियां उड़ाना मान रहा है।
सीजफायर की शर्तों के अनुसार, ईरान के हवाई क्षेत्र की संप्रभुता का सम्मान करना और किसी भी प्रकार की सैन्य घुसपैठ न करना तय हुआ था। लेकिन ईरान ने दावा किया है कि एक घुसपैठ करने वाले ड्रोन ने ईरानी हवाई सीमा में प्रवेश किया। इस ड्रोन को ईरान के फार्स प्रांत के लार शहर के पास मार गिराया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे समझौते का दूसरा बड़ा और स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। उनका कहना है कि एक तरफ शांति की बातें की जा रही हैं और दूसरी तरफ ईरान की जासूसी और हवाई क्षेत्र का अतिक्रमण जारी है।
ईरान ने तीसरा और सबसे गंभीर आरोप अमेरिका पर लगाया है। समझौते के ढांचे की छठी शर्त के अनुसार, ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अधिकार को मान्यता दी जानी थी। हालांकि, ईरान का दावा है कि अमेरिका और इजरायल ने अब इस अधिकार को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। परमाणु संवर्धन का मुद्दा ईरान के लिए हमेशा से राष्ट्रीय अस्मिता और सुरक्षा का विषय रहा है। इस अधिकार को नकारे जाने के बाद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी तकनीकी प्रगति और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
ईरानी संसद अध्यक्ष ग़ालिबफ़ के अनुसार, जिस व्यावहारिक आधार पर बातचीत की जानी थी, उसे वार्ता शुरू होने से पहले ही तोड़ दिया गया है। ऐसी स्थिति में द्विपक्षीय युद्धविराम को बनाए रखना ईरान के लिए असंभव होता जा रहा है। अब सबकी नजरें अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों पर हैं कि क्या वे इस बिखरते समझौते को बचा पाएंगे। यदि समय रहते इन तीन प्रमुख शिकायतों का समाधान नहीं किया गया, तो इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही विफल हो सकती है, जिससे पूरी दुनिया पर तेल संकट और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और बढ़ जाएगा।
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