Iran-US Ceasefire Crisis
Iran-US Ceasefire Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच जिस युद्धविराम को लेकर दुनिया ने राहत की सांस ली थी, वह अब खतरे में नजर आ रहा है। सीजफायर लागू हुए अभी 48 घंटे भी नहीं बीते हैं कि दोनों देशों के बीच फिर से तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। कूटनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह अल्पविराम स्थायी शांति में बदल पाएगा या नहीं। ईरान की ओर से आए सख्त बयानों ने इस पूरी प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर सीजफायर की शर्तों को तोड़ने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह पुरानी आदत रही है कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट जाता है। गालिबाफ के अनुसार, अमेरिका के प्रति ईरान का गहरा अविश्वास उसके द्वारा बार-बार किए गए उल्लंघनों का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शर्तों का पालन नहीं हुआ, तो वार्ता के लिए तैयार किया गया ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा और ईरान अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने को मजबूर होगा।
गालिबाफ ने उन तीन प्रमुख बिंदुओं का जिक्र किया है, जिनका उल्लंघन वार्ता शुरू होने से पहले ही हो चुका है। उनके अनुसार, 10 सूत्री प्रस्ताव के पहले खंड—जिसमें लेबनान सहित सभी क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम की बात थी—उसका पालन नहीं किया गया है। दूसरा गंभीर उल्लंघन ईरान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले ड्रोन का है, जिसे फार्स प्रांत में मार गिराया गया। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से इनकार करना है, जो कि समझौते का मुख्य हिस्सा था। ईरान का कहना है कि इन बुनियादी शर्तों के उल्लंघन के बाद द्विपक्षीय बातचीत करना अब अव्यावहारिक हो गया है।
ईरान के आरोपों पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बेहद कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान का मुद्दा कभी भी इस सीजफायर वार्ता का हिस्सा नहीं था और इससे ईरान का कोई सीधा लेना-देना नहीं होना चाहिए। वेंस ने कहा कि अगर ईरान लेबनान के बहाने इस शांति प्रक्रिया को विफल करना चाहता है, तो यह उसका अपना फैसला होगा, लेकिन अमेरिका इसे पूरी तरह से ‘मूर्खतापूर्ण’ कदम मानेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अपनी शर्तों पर अडिग है और वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा।
विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने एक आधिकारिक ट्वीट के जरिए ईरान को अपनी सैन्य ताकत का एहसास कराया है। व्हाइट हाउस ने दावा किया कि उनके तय लक्ष्यों को योजना के अनुसार हासिल कर लिया गया है। ट्वीट में कहा गया कि ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुँचाया गया है, उनका रक्षा औद्योगिक आधार पूरी तरह नष्ट हो चुका है और परमाणु हथियार बनाने की उनकी महत्वाकांक्षाओं को नाकाम कर दिया गया है। अमेरिका का तर्क है कि ईरान की क्षेत्र को धमकाने की क्षमता को व्यवस्थित रूप से खत्म कर दिया गया है, जो उनकी बड़ी रणनीतिक जीत है।
वर्तमान स्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी हो चुकी है। जहाँ ईरान इसे अपनी संप्रभुता और अधिकारों का हनन बता रहा है, वहीं अमेरिका इसे अपनी सैन्य सफलता के रूप में देख रहा है। पाकिस्तान और अन्य देशों द्वारा की गई मध्यस्थता अब खतरे में है। यदि आगामी दिनों में कूटनीतिक स्तर पर इन मतभेदों को सुलझाया नहीं गया, तो सीजफायर की यह कोशिश केवल एक कागजी कार्यवाही बनकर रह जाएगी और क्षेत्र में एक बार फिर बड़े युद्ध की चिंगारी भड़क सकती है।
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