US Iran Ceasefire
US Iran Ceasefire : अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चल रहे तनाव और सैन्य संघर्ष के बाद, अब ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर एक ऐतिहासिक सहमति बन गई है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ ने व्हाइट हाउस के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि दोनों देशों के बीच अगले 48 घंटों के भीतर एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही दोनों राष्ट्र आधिकारिक तौर पर युद्ध समाप्ति की घोषणा करेंगे। यह पहली बार है जब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन और ईरानी नेतृत्व के बीच इतने गंभीर मुद्दों पर स्पष्ट सहमति बनी है, जिससे वैश्विक बाजार और सुरक्षा व्यवस्था में स्थिरता आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों पक्ष एक संक्षिप्त, यानी केवल एक पन्ने का समझौता पत्र तैयार कर रहे हैं। इस पत्र में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों का जिक्र किया गया है, जिन पर दोनों देशों के बीच गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण बिंदु परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। ईरान आधिकारिक तौर पर यह घोषणा करने को तैयार है कि वह भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और यूरेनियम संवर्धन की अपनी सभी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा देगा। इसके अलावा, ईरान के पास मौजूद मौजूदा यूरेनियम भंडार को पतला (Dilute) करने या नष्ट करने पर भी सहमति बनी है। हालांकि, यूरेनियम को नष्ट करने के स्थान को लेकर अभी गोपनीयता बरती जा रही है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक अमेरिका स्थानांतरित किया जाए।
समझौते का दूसरा सबसे अहम पहलू ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। इस शांति संधि के तहत, अमेरिका ईरान पर लगाए गए सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज की गई ईरान की विशाल धनराशि को भी वापस किया जाएगा। शुरुआती चरण में, ईरान को मानवीय सहायता और राहत कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा। ज्ञात हो कि साल 2015 के परमाणु समझौते के समय भी 150 अरब डॉलर की राशि को अनफ्रीज करने की बात उठी थी, जिसे बाद में ट्रंप प्रशासन ने रोक दिया था। अब इस नए समझौते से ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में बड़ी मदद मिलेगी।
तीसरा महत्वपूर्ण समझौता सामरिक रूप से संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर हुआ है। पिछले कई महीनों से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच भारी तनाव था। अब नई सहमति के तहत, होर्मुज की नाकाबंदी को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। ईरान ने आश्वासन दिया है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी बाधा के गुजरने देगा। बदले में, अमेरिका भी इस क्षेत्र में अपनी आक्रामक सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित करेगा और किसी भी जहाज को डिस्टर्ब नहीं करेगा। यह फैसला वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित होगा, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है।
हालांकि तीन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन 14 सूत्रीय एजेंडे में से अभी भी 11 जटिल मुद्दों पर बातचीत चल रही है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनेर लगातार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के संपर्क में हैं। अगले 30 दिनों के भीतर इन बचे हुए पेचों को सुलझाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को फिलहाल रोक दिया गया है ताकि शांति प्रक्रिया को बल मिल सके। माना जा रहा है कि समझौते की अंतिम बैठक इस्लामाबाद या जिनेवा जैसे तटस्थ स्थान पर हो सकती है, जिसमें अमेरिका की ओर से जेडी वेंस और ईरान की ओर से एमबी गालिबफ के शामिल होने की उम्मीद है। यह कूटनीतिक जीत विश्व शांति की दिशा में एक नया अध्याय लिख सकती है।
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