Iran US Peace Plan
Iran US Peace Plan : ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक आधिकारिक वक्तव्य जारी कर राष्ट्र के नाम अपना संदेश साझा किया है। परिषद ने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत को नमन करते हुए इसे एक “निर्विवाद और ऐतिहासिक जीत” करार दिया है। वक्तव्य की शुरुआत अल्लाह के नाम से करते हुए कहा गया कि ईरानी जनता ने अपने साहस से दुश्मन की अवैध और आपराधिक साजिशों को करारी शिकस्त दी है। परिषद के अनुसार, नए नेता आयतुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के कुशल मार्गदर्शन में ईरान ने अमेरिका को अपनी शर्तों पर बातचीत की मेज पर आने के लिए विवश कर दिया है।
ईरान ने दावा किया है कि इस युद्ध-विराम के लिए उसने अपनी 10 सूत्री योजना को आधार बनाया है, जिसे अमेरिका ने स्वीकार करने पर सहमति जताई है। इस योजना की प्रमुख मांगों में होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण बनाए रखना, परमाणु संवर्धन की स्वीकृति, ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना और संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों को समाप्त करना शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है और सबसे महत्वपूर्ण शर्त के रूप में पूरे क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी पर जोर दिया है।
परिषद ने अपने बयान में दुश्मन (अमेरिका और उसके सहयोगियों) की विफलता का विश्लेषण करते हुए कहा कि शुरुआत में शत्रु का मानना था कि वे ईरान को शीघ्र ही आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर देंगे। उन्होंने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को कम आंका था। दुश्मन की योजना ईरान के संसाधनों पर कब्जा करने और देश को अराजकता में धकेलने की थी, लेकिन ईरान और ‘प्रतिरोध बलों’ (Resistance Forces) ने मिलकर दुश्मन के बुनियादी ढांचे को कुचल दिया। ईरान का दावा है कि पिछले 40 दिनों के भीषण संघर्ष ने दुश्मन को आत्मसमर्पण के कगार पर ला खड़ा किया है।
युद्ध के मैदान से अब कूटनीति की ओर कदम बढ़ाते हुए, ईरान ने घोषणा की है कि अगले 15 दिनों के भीतर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की जाएगी। परिषद ने साफ किया है कि यह वार्ता केवल ईरान के सिद्धांतों पर आधारित होगी। हालांकि, इसे युद्ध का अंत नहीं माना जाना चाहिए; ईरान युद्ध की समाप्ति तभी स्वीकार करेगा जब उसके सिद्धांतों की विस्तृत पुष्टि हो जाएगी। यह वार्ता 21 फरवरदीन (ईरानी कैलेंडर) से शुरू होगी, जो अमेरिका पर ‘पूर्ण अविश्वास’ के साथ आगे बढ़ेगी।
ईरान ने अपने नागरिकों को विजयोत्सव मनाने का आह्वान करते हुए चेतावनी भी दी है। परिषद ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वार्ता केवल युद्धक्षेत्र का विस्तार है। अगर बातचीत में वांछित राजनीतिक लाभ नहीं मिला, तो ईरान फिर से युद्ध के मैदान में उतरने को तैयार है। वक्तव्य के अंत में कड़े लहजे में कहा गया, “हमारी मुट्ठी में बंदूक है, और दुश्मन की जरा सी भी गलती पर हम पूरी ताकत से जवाब देंगे।” ईरान ने अपने लोगों से एकता बनाए रखने और नेतृत्व पर भरोसा करने की अपील की है ताकि इस ऐतिहासिक संघर्ष को इसके तार्किक अंजाम तक पहुँचाया जा सके।
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