Iran US War : ईरान युद्ध में अमेरिका के 81 विमान कैसे हुए तबाह, सामने आई पूरी चौंकाने वाली रिपोर्ट

ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका को बड़ा सैन्य नुकसान हुआ है। नई रिपोर्ट के मुताबिक 81 अमेरिकी सैन्य विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं। इनमें 45 MQ-9 रीपर ड्रोन और कई प्रमुख लड़ाकू विमान शामिल हैं। अब सवाल है कि इतने बड़े नुकसान के बाद अमेरिकी रक्षा क्षमता और सैन्य उत्पादन पर कितना दबाव पड़ेगा।

Iran US War : ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष में अमेरिका के कम से कम 81 सैन्य विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट होने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च शाखा कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस यानी CRS की सोमवार, 5 अक्टूबर को जारी अपडेटेड रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इस आंकड़े ने अमेरिकी सैन्य तैयारियों और युद्ध की लागत को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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युद्धक विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन शामिल

CRS की रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान उठाने वाले अमेरिकी सैन्य विमानों में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मानव रहित ड्रोन शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चल रहे सैन्य अभियान और कुछ वर्गीकृत जानकारियों के कारण नुकसान का आंकड़ा आगे बदल सकता है। कुछ क्षतिग्रस्त विमानों को मरम्मत के बाद दोबारा सेवा में शामिल किया जा चुका है।

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MQ-9 रीपर ड्रोन को सबसे ज्यादा नुकसान

अमेरिकी विमानों में सबसे अधिक नुकसान MQ-9 रीपर ड्रोन को हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अभियानों के दौरान अमेरिका ने कम से कम 45 रीपर ड्रोन खो दिए। ये ड्रोन निगरानी और सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन के नुकसान से अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

F-15E स्ट्राइक ईगल भी प्रभावित

लड़ाकू विमानों में 12 F-15E स्ट्राइक ईगल विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में कुवैत के ऊपर अपने ही बलों की गलती से तीन विमान नष्ट हुए थे। इसके बाद अप्रैल में ईरानी हवाई क्षेत्र में एक अन्य विमान नष्ट हुआ। सितंबर में जॉर्डन के मुवाफक सलती एयरबेस पर ईरानी हमले में आठ F-15E विमान मामूली रूप से क्षतिग्रस्त हुए।

कुछ विमान फिर सेवा में लौटे

CRS के अनुसार, जॉर्डन में क्षतिग्रस्त हुए कुछ F-15E विमानों को मरम्मत के बाद दोबारा ऑपरेशन में शामिल कर लिया गया। इसका मतलब यह है कि रिपोर्ट में दर्ज हर नुकसान का अर्थ स्थायी रूप से विमान खोना नहीं है। फिर भी इतने बड़े पैमाने पर सैन्य विमान क्षतिग्रस्त होना अमेरिकी अभियान के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

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F-35 और A-10 को भी नुकसान

क्षतिग्रस्त या नष्ट अमेरिकी विमानों की सूची में एक F-35A लाइटनिंग II और दो A-10 थंडरबोल्ट II भी शामिल हैं। इसके अलावा हवा में ईंधन भरने वाले सात KC-135 टैंकर तथा निगरानी और हवाई चेतावनी के लिए इस्तेमाल होने वाला एक E-3 सेंट्री विमान भी प्रभावित हुआ है।

विशेष अभियान वाले विमान भी चपेट में

CRS की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाले दो MC-130J विमान, एक HH-60W रेस्क्यू हेलीकॉप्टर, एक MQ-4C ट्राइटन और तीन MQ-1 ड्रोन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल विशेष अभियानों, निगरानी, बचाव और खुफिया गतिविधियों में किया जाता है।

हेलीकॉप्टरों को भी भारी नुकसान

अमेरिकी हेलीकॉप्टर बेड़े को भी संघर्ष में नुकसान पहुंचा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के गिराए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इसके अलावा बचाव अभियान के दौरान चार AH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर नष्ट हुए। अरब सागर में एक MH-60 सी हॉक भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

अमेरिकी कांग्रेस की बढ़ सकती है निगरानी

CRS ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में सैन्य विमानों के नुकसान से अमेरिकी कांग्रेस की निगरानी और जांच बढ़ सकती है। खास तौर पर यह सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है कि पेंटागन के पास नष्ट और क्षतिग्रस्त विमानों को बदलने के लिए पर्याप्त बजट, उपकरण और संसाधन मौजूद हैं या नहीं।

E-3 सेंट्री जैसे विमानों का नुकसान चिंता का विषय

रिपोर्ट में महत्वपूर्ण सैन्य प्लेटफॉर्म के नुकसान को लेकर भी चिंता जताई गई है। E-3 सेंट्री जैसे विमान हवाई निगरानी और कमांड एवं कंट्रोल में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे विमान के नुकसान से अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी और समन्वय क्षमता पर कितना असर पड़ा है, इस पर भी कांग्रेस में सवाल उठ सकते हैं।

तेजी से नए विमान बनाना आसान नहीं

CRS के अनुसार, अमेरिकी रक्षा उद्योग के सामने पहले से उत्पादन क्षमता और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में विमानों के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने के बाद उन्हें तेजी से बदलना आसान नहीं होगा। उत्पादन प्रक्रिया, कलपुर्जों की उपलब्धता और प्रशिक्षित संसाधनों की कमी इसमें बाधा बन सकती है।

अमेरिकी रक्षा उद्योग पर बढ़ेगा दबाव

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि विदेशों में सैन्य उपकरणों की आपूर्ति और मौजूदा मांग के कारण अमेरिकी रक्षा उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यदि युद्ध लंबा चलता है तो अमेरिका को विमानों की मरम्मत, नए प्लेटफॉर्म के उत्पादन और सैन्य आपूर्ति व्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ सकते हैं।

युद्ध की कीमत पर उठेंगे नए सवाल

ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिकी सैन्य विमानों को हुए नुकसान ने युद्ध की रणनीति, सैन्य खर्च और भविष्य की तैयारी को लेकर बहस तेज कर दी है। 81 विमानों का आंकड़ा अमेरिकी सैन्य क्षमता पर तत्काल निर्णायक प्रभाव साबित नहीं करता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि लंबे संघर्ष में अमेरिका के संसाधनों और रक्षा उत्पादन तंत्र पर कितना दबाव पड़ सकता है।

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Chandan Das

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