Iran US War : अब कोई सीजफायर नहीं, युद्ध का स्थायी अंत चाहिए, बोले ईरानी विदेश मंत्री अराघची

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि ईरान केवल अस्थायी सीजफायर स्वीकार नहीं करेगा। उसका लक्ष्य युद्ध का स्थायी अंत है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

Iran US War :  ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच तेहरान ने अस्थाई युद्धविराम की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ केवल कुछ दिनों या सीमित अवधि के लिए युद्ध रोकने वाले किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। उनके मुताबिक, पिछले करीब छह महीनों से जारी तनाव और संघर्ष का समाधान स्थायी होना चाहिए, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।

ads
Adst

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रखा ईरान का रुख

अर्ध-सरकारी मीडिया संस्था फार्स न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अराघची ने ईरान की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मध्यस्थ देशों को पहले ही बता दिया गया है कि ईरान अस्थाई सीजफायर के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी समझौते का उद्देश्य केवल संघर्ष को कुछ समय के लिए रोकना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान निकालना होना चाहिए जिससे युद्ध दोबारा शुरू होने की संभावना खत्म हो जाए।

Adst

स्थायी समाधान पर ईरान का जोर

अराघची के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अब किसी अस्थाई व्यवस्था के बजाय अंतिम और बाध्यकारी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ईरान की प्राथमिकता ऐसा समाधान हासिल करना है, जिससे उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई और उससे जुड़े दबावों को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सके। हालांकि इस तरह के समझौते तक पहुंचना दोनों पक्षों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

खाड़ी की सुरक्षा में आर्थिक पहलू भी जरूरी

ईरानी विदेश मंत्री ने फारस की खाड़ी की सुरक्षा को लेकर भी अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा को केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें आर्थिक और सामूहिक सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए। उनका संकेत है कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा भी साझा सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होनी चाहिए।

बाहरी हस्तक्षेप कम करने का संकेत

ईरान की ओर से सामूहिक और आर्थिक सुरक्षा की बात को क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। तेहरान का तर्क है कि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापार तभी सुरक्षित रह सकते हैं, जब क्षेत्रीय देश मिलकर सुरक्षा ढांचा तैयार करें। इससे बाहरी शक्तियों पर निर्भरता और हस्तक्षेप कम करने की दिशा में भी रास्ता खुल सकता है।

Adst

मध्यस्थ देशों के सामने बढ़ी चुनौती

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहे मध्यस्थ देशों के लिए अब बातचीत और मुश्किल हो सकती है। कतर, ओमान और अन्य संभावित मध्यस्थों को केवल अस्थाई युद्धविराम तक सीमित समाधान खोजने के बजाय व्यापक शांति समझौते का रास्ता तलाशना होगा। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों को एक मंच पर लाना कूटनीतिक स्तर पर बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

ट्रंप ने वार्ता की योजना से किया इनकार

दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि फिलहाल अमेरिका की ईरान के साथ बातचीत करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि सीमित समुद्री यातायात के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य खुला और सक्रिय है। जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही गंभीर मतभेद चल रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

ओमान को लेकर भी ट्रंप की चेतावनी

इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने ओमान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी देने की बात सामने आई थी। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, यह चेतावनी उस समय दी गई जब ओमान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के प्रबंधन को लेकर ईरान के साथ समझौते की मांग की थी। इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक दबाव को और बढ़ा दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की शर्त

ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का असर तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है।

जलडमरूमध्य में जहाज पर हमले से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर कथित तौर पर प्रक्षेपास्त्र गिरने की घटना भी सामने आई। इसी दौरान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला करने का दावा किया। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

युद्ध खत्म करने के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती

ईरान का स्थायी समाधान पर जोर और अमेरिका का फिलहाल बातचीत से इनकार आने वाले समय में तनाव कम करने की राह कठिन बना सकता है। एक तरफ तेहरान अस्थाई युद्धविराम को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वॉशिंगटन की ओर से बातचीत को लेकर स्पष्ट पहल नजर नहीं आ रही। ऐसे में मध्यस्थ देशों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों पक्ष स्थायी शांति के लिए किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं या नहीं।

Read More : JSSC CGL Cancelled: झारखंड में 44 भर्ती परीक्षाओं पर एक्शन, सरकार ने जारी की पूरी लिस्ट

Adst
Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.