Iran US War
Iran US War : मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और अमेरिका के बीच का भीषण संघर्ष अब एक ऐसे नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां युद्ध के मैदान में हो रही गोलाबारी से कहीं ज्यादा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने भ्रम पैदा कर दिया है। मंगलवार तक स्थिति यह थी कि ट्रंप के बयानों में लगातार हो रहे बदलावों ने न केवल उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को बल्कि विरोधियों को भी हैरान कर दिया है। संघर्ष के इस दौर में जहां स्पष्टता की आवश्यकता है, वहीं व्हाइट हाउस से आने वाले विरोधाभासी संदेशों ने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में हर 12 घंटे में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। फ्लोरिडा के डोरल शहर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका कई मायनों में यह युद्ध जीत चुका है। हालांकि, अगले ही पल उन्होंने यह जोड़कर सबको चौंका दिया कि अभी पूर्ण विजय प्राप्त नहीं हुई है। ट्रंप की इस अस्पष्टता का आलम यह था कि उन्होंने सीबीएस न्यूज से बातचीत में युद्ध को ‘लगभग खत्म’ बताया, लेकिन जब पत्रकारों ने समयसीमा पूछी, तो उन्होंने इसे जल्दबाजी में टाल दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी युद्ध को लेकर एक राय नहीं बन पाई है।
हैरानी की बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के दावे उनके अपने ही रक्षा मंत्री के बयानों से मेल नहीं खा रहे हैं। जहां राष्ट्रपति शांति और समाप्ति की बात कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री इस पूरे घटनाक्रम को ‘सिर्फ एक शुरुआत’ करार दे रहे हैं। इस गहरे विरोधाभास पर जब ट्रंप से सवाल किया गया, तो उन्होंने विचित्र तर्क देते हुए कहा कि दोनों ही बातें सही हो सकती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यह क्षेत्र में एक नए देश के निर्माण की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, यह उनके उन सलाहकारों की बातों के बिल्कुल विपरीत है, जिन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका किसी भी तरह की ‘नेशन बिल्डिंग’ की प्रक्रिया में शामिल नहीं होगा।
सैन्य मोर्चे पर तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि अब तेहरान पर सीधे हमले की चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका तेहरान के सामरिक ठिकानों पर B-52 बमवर्षक विमानों के जरिए 32,000 किलो वजनी महाविनाशकारी बम गिराने की योजना बना सकता है। इस सैन्य दबाव और युद्ध की आहट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है, जहाँ कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने अब तेल बाजार को स्थिर करने के लिए कुछ देशों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने के संकेत दिए हैं, जो उनकी पिछली ‘कठोर नीतियों’ के बिल्कुल उलट है।
ट्रंप की इस ‘अस्पष्ट रणनीति’ पर विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने तीखे प्रहार शुरू कर दिए हैं। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के पास न तो कोई ठोस सैन्य रणनीति है और न ही भविष्य की कोई स्पष्ट योजना। वे केवल सोशल मीडिया और टीवी इंटरव्यू के जरिए नीति निर्धारण कर रहे हैं। इन सबके बीच, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि वे ईरान के साथ मेज पर बैठकर बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि सब कुछ ईरान के रवैये और उनकी शर्तों पर निर्भर करेगा।
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