IRDAI New Rules : बीमा पॉलिसी खरीदते समय ग्राहकों को कई बार अधूरी या गलत जानकारी मिलने की शिकायतें सामने आती हैं। कुछ मामलों में एजेंट पॉलिसी के फायदे बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, जबकि उसकी शर्तों और जोखिमों की पूरी जानकारी ग्राहक को नहीं मिल पाती। वहीं, अधिक रिटर्न का लालच देकर भी कुछ बीमा उत्पादों की बिक्री किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसी मिस-सेलिंग पर रोक लगाने के लिए बीमा नियामक IRDAI ने सख्त प्रावधानों वाला प्रस्ताव पेश किया है।
गलत तरीके से बेची गई पॉलिसी पर कमीशन वापस होगा
प्रस्तावित नियमों में एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव का प्रावधान है। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी ग्राहक को गुमराह करके या गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेची गई थी, तो संबंधित एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को मिला कमीशन वापस लिया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिक्री के दौरान गलत जानकारी देने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना है।
एजेंटों पर बढ़ेगी जवाबदेही
मौजूदा व्यवस्था में पॉलिसी बेचने के बाद एजेंट को कमीशन मिलने के बावजूद मिस-सेलिंग के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया अलग हो सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था एजेंट की जिम्मेदारी को अधिक स्पष्ट करने की दिशा में है। यदि बिक्री में नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो आर्थिक नुकसान सीधे संबंधित बिक्रीकर्ता तक पहुंच सकता है। इससे एजेंटों को पॉलिसी की सही जानकारी देने के लिए अधिक सावधानी बरतनी होगी।
पॉलिसी के साथ सेल्सपर्सन की पहचान जरूरी
IRDAI के प्रस्ताव में पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़ा प्रावधान भी शामिल है। इसके तहत प्रत्येक बीमा पॉलिसी के साथ उसे बेचने वाले एजेंट या सेल्सपर्सन की पहचान जोड़ना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को यह स्पष्ट रूप से पता रहे कि पॉलिसी बेचने की प्रक्रिया में उसके संपर्क में कौन व्यक्ति था।
ग्राहक देख सकेंगे एजेंट का पिछला रिकॉर्ड
प्रस्तावित व्यवस्था में एजेंट के पिछले बिक्री रिकॉर्ड को लेकर भी पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही गई है। यदि किसी सेल्सपर्सन के खिलाफ मिस-सेलिंग का मामला सामने आता है और वह नियामकीय कार्रवाई के दायरे में आता है, तो उसके रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक किए जाने का प्रस्ताव है। इससे भविष्य में ग्राहक पॉलिसी खरीदने से पहले संबंधित एजेंट की जानकारी जांच सकेंगे।
बैंक कर्मचारियों के बिक्री टारगेट पर सवाल
बीमा की बिक्री में बैंक और एनबीएफसी कर्मचारियों की भूमिका भी प्रस्तावित बदलावों के दायरे में आ सकती है। कई जगह कर्मचारियों को बीमा उत्पाद बेचने के लिए बिक्री आधारित लक्ष्य या प्रोत्साहन दिए जाते हैं। इससे ग्राहक पर ऐसी पॉलिसी खरीदने का दबाव बनने की संभावना रहती है जिसकी उसे वास्तव में आवश्यकता न हो।
पॉलिसी बेचने पर इंसेंटिव रोकने का प्रस्ताव
IRDAI के प्रस्ताव के अनुसार बैंक कर्मचारियों को बीमा पॉलिसियों की संख्या या बिक्री लक्ष्य पूरा करने के आधार पर इंसेंटिव देने की व्यवस्था पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बिक्री लक्ष्य के दबाव को कम करना और ग्राहकों के हितों को प्राथमिकता देने वाली प्रक्रिया विकसित करना है। हालांकि, प्रस्तावित नियमों का अंतिम स्वरूप लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बीमा को FD बताकर बेचने पर कार्रवाई
मिस-सेलिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू बीमा पॉलिसी को निवेश या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे उत्पाद के रूप में पेश करना है। प्रस्तावित नियमों में ऐसी बिक्री को गंभीरता से लेने की बात कही गई है। बीमा का मूल उद्देश्य जोखिम से वित्तीय सुरक्षा देना है। इसलिए यदि किसी पॉलिसी को गारंटीड निवेश या अधिक रिटर्न वाली योजना के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, तो यह मिस-सेलिंग के दायरे में आ सकता है।
ग्राहकों को खरीद से पहले सतर्क रहना होगा
नए प्रस्ताव का उद्देश्य बीमा बाजार में बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। हालांकि, नियमों के लागू होने के बाद भी ग्राहकों के लिए पॉलिसी की शर्तें, प्रीमियम, लॉक-इन अवधि, रिटर्न, जोखिम और बाहर निकलने के नियमों को समझना जरूरी रहेगा। प्रस्तावित बदलावों से एजेंटों और संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाने तथा ग्राहकों को गलत जानकारी के आधार पर पॉलिसी खरीदने से बचाने की दिशा में नियामकीय व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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