ISIS Terrorists Escape
ISIS Terrorists Escape: सीरिया के सुदूर रेगिस्तानी इलाकों में स्थित डिटेंशन कैंपों से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। सालों से कड़े पहरे में रखे गए हजारों संदिग्ध इस्लामिक स्टेट (IS) आतंकियों और उनके परिवारों को लेकर अब अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 22,000 लोग अचानक निगरानी व्यवस्था से बाहर हो गए हैं। उत्तर-पूर्वी सीरिया के इन संवेदनशील क्षेत्रों की कमान लंबे समय से कुर्द नेतृत्व वाली ‘सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज’ (SDF) के हाथों में थी, लेकिन क्षेत्रीय समीकरणों के बदलने से अब यह नियंत्रण पूरी तरह चरमरा गया है।
सुरक्षा व्यवस्था ढहने का सबसे घातक असर कुख्यात ‘अल-होल’ (Al-Hol) कैंप पर पड़ा है। किसी समय 24,000 से अधिक कट्टर समर्थकों से भरा रहने वाला यह कैंप महज कुछ ही हफ्तों के भीतर लगभग खाली हो गया है। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के पीछे हटते ही वहां अराजकता फैल गई; कैदियों ने टेंटों में आग लगा दी, कंटीली बाड़ें तोड़ दीं और पहरेदारों को बंधक बना लिया। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो बड़ी संख्या में संदिग्धों ने अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की मदद ली और रातों-रात गायब होने में सफल रहे। यह पलायन वैश्विक आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कैंपों से निकले इन लोगों में से अधिकांश सीरियाई नागरिक अपने मूल शहरों और गांवों की ओर लौट गए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चिंता उन विदेशी लड़ाकों और कट्टर समर्थकों को लेकर है जिनकी जांच-पड़ताल नहीं हो पाई है। अंदेशा जताया जा रहा है कि ये लोग इदलिब और अलेप्पो जैसे संघर्षग्रस्त प्रांतों की ओर चले गए हैं। इन इलाकों में पहले से ही कई विद्रोही गुट सक्रिय हैं, ऐसे में आईएस के पूर्व लड़ाकों का वहां पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद उड़ा रहा है। सीरियाई सरकार अब बचे हुए इराकी नागरिकों को अलेप्पो के पास ‘अख्तरिन’ में शिफ्ट करने की योजना बना रही है।
जहाँ एक ओर अराजकता का माहौल है, वहीं ‘रोज कैंप’ (Roj camp) अभी भी आंशिक रूप से SDF के नियंत्रण में बना हुआ है। फरवरी 2026 में, 34 ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं और बच्चों को उनके देश वापस भेजने का एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया था। हालांकि, तकनीकी समन्वय और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण यह काफिला बीच रास्ते से ही वापस लौट आया। यह घटना दर्शाती है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को वापस लाना अब कितना जोखिम भरा और राजनीतिक रूप से जटिल हो गया है। इसी बीच, कुछ यूरोपीय महिलाओं ने अवैध रास्तों से तुर्की पहुंचकर अपने देशों के दूतावासों से संपर्क साधा है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बड़ा सुरक्षा ऑपरेशन चलाया है। किसी भी संभावित जेल ब्रेक या बड़े हमले को रोकने के लिए अमेरिका ने करीब 5,700 संदिग्ध पुरुष लड़ाकों को हवाई मार्ग के जरिए सुरक्षित रूप से इराक भेज दिया है। वहां उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं और गहन पूछताछ का सामना करना होगा। हालांकि इस कदम से सीरिया में तत्काल खतरा कम हुआ है, लेकिन अब हजारों खूंखार आतंकियों की निगरानी और उनके मुकदमों का भारी बोझ बगदाद सरकार के कंधों पर आ गया है।
सीरियाई कैंपों से इस तरह हजारों लोगों का गायब होना केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन कट्टरपंथियों को समय रहते ट्रैक नहीं किया गया, तो यह इस्लामिक स्टेट के पुनर्गठन का कारण बन सकता है। वर्तमान में सीरिया की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों ने एक ऐसा ‘सुरक्षा शून्य’ पैदा कर दिया है जिसका फायदा आतंकवादी संगठन उठा सकते हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बिखरते सुरक्षा तंत्र को फिर से कैसे मजबूत करता है।
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