Maharashtra Cotton Farmers
Maharashtra Cotton Farmers: महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कपास उत्पादक किसान इन दिनों एक बड़ी चिंता से जूझ रहे हैं। अकोला जिले सहित राज्य के 24 जिलों के लगभग 35 लाख कपास किसानों की समस्याओं को विधायक रणधीर सावरकर ने पुरजोर तरीके से उठाया है। सावरकर ने राज्य और केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि कपास की खेती और उसकी तुड़ाई का सीजन केवल फरवरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह अप्रैल-मई तक चलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारी खरीद की प्रक्रिया समय से पहले बंद हो गई, तो लाखों किसानों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा।
वर्तमान नियमों के अनुसार, भारतीय कपास निगम (CCI) की खरीद प्रक्रिया फरवरी के अंत में समाप्त होने वाली है। विधायक सावरकर ने स्पष्ट किया कि यदि 27 फरवरी 2026 को खरीद बंद कर दी जाती है, तो किसानों को अपना बचा हुआ स्टॉक खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा। खुले बाजार में भाव गिरने से किसानों को भारी आर्थिक चपत लगेगी। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सावरकर ने मांग की है कि कपास खरीद योजना की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अप्रैल 2026 तक किया जाना चाहिए, ताकि हर किसान को अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिल सके।
विधायक सावरकर की मांग की संवेदनशीलता को समझते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। फडणवीस ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि महाराष्ट्र के व्यापक कृषि परिदृश्य को देखते हुए खरीद प्रक्रिया को जारी रखना अनिवार्य है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए सीसीआई को अप्रैल 2026 तक कपास खरीदने के निर्देश दिए जाएं, ताकि बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाया जा सके।
इस मुहिम को और मजबूती देने के लिए सांसद अनूप धोत्रे ने भी दिल्ली के गलियारों में प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों तक किसानों की इस जायज मांग को पहुँचाया है। राज्य और केंद्र के बीच इस समन्वय ने ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। किसानों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि इसी तरह उनकी समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे, तो उन्हें साहूकारों और बिचौलियों के चंगुल में फँसने से बचाया जा सकता है।
अकोला और आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने विधायक रणधीर सावरकर के प्रयासों की जमकर सराहना की है। किसानों के प्रति उनकी तड़प और समय रहते उठाए गए कदमों ने उन्हें एक जननेता के रूप में और मजबूती दी है। सरकार ने भी उनके नेतृत्व और कृषि क्षेत्र की गहरी समझ को मान्यता देते हुए उन्हें कई महत्वपूर्ण समितियों में जिम्मेदारियां सौंपी हैं। फिलहाल, पूरे राज्य के कपास उत्पादकों की नजरें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस साल किसानों के घर में समृद्धि आएगी या आर्थिक तंगी।
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