Islamabad Peace Talks
Islamabad Peace Talks : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गई है। पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अब दूसरे दौर की कोशिशें तेज हो गई हैं। हालांकि, इस शांति प्रक्रिया को तब बड़ा झटका लगा जब ईरान ने अमेरिका के नए प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत और सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को अमेरिका का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच रहा है। इस दल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस दौरे में शामिल होने पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। अमेरिकी दूतों का यह दौरा इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि वे ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करेंगे। रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी सैन्य विमान C-17 ग्लोबमास्टर III की लैंडिंग के साथ ही कूटनीतिक हलचलें और तेज हो गई हैं।
शांति वार्ता के दूसरे दौर से ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर लंबी बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अस्थिरता को समाप्त करना और ईरान को वार्ता के लिए राजी करना था। शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति को सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेतृत्व के साथ हुई अपनी हालिया बातचीत से अवगत कराया। पाकिस्तान इस समय एक ऐसे पुल के रूप में काम करने की कोशिश कर रहा है जो युद्ध प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति स्थापित करने में सहायक हो सके।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को “अतार्किक मांगों” के कारण खारिज कर दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका बार-बार अपना स्टैंड बदल रहा है और उसकी शर्तें जायज नहीं हैं। सबसे बड़ा विवाद ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी को लेकर है। ईरान इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन और “समुद्री डकैती” मान रहा है। जब तक अमेरिका अपनी सैन्य घेराबंदी कम नहीं करता, ईरान किसी भी औपचारिक वार्ता में शामिल होने को तैयार नहीं दिख रहा।
अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान की मध्यस्थता पर हैं। क्या शहबाज शरीफ ईरान के कड़े रुख को नरम कर पाएंगे? गौरतलब है कि पहले दौर की विफलता के बावजूद, अमेरिका और ईरान दोनों ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की थी। पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी हाल ही में तेहरान का दौरा कर ईरानी सैन्य नेतृत्व से बातचीत की थी। पाकिस्तान की सेना और सरकार दोनों इस समय ईरान और अमेरिका के बीच की खाई को पाटने के लिए सक्रिय हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में अशांति का सीधा असर पाकिस्तान की सुरक्षा पर भी पड़ता है।
अमेरिकी डेलीगेशन की सुरक्षा के मद्देनजर इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को चरम पर पहुंचा दिया गया है। एयरबेस से लेकर शहर के ‘रेड जोन’ तक की सड़कों को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है। सेरेना और मैरियट जैसे पांच सितारा होटलों को खाली कराकर नई बुकिंग्स पर रोक लगा दी गई है। चूंकि 11 अप्रैल को हुई पहली बैठक सेरेना होटल में ही आयोजित की गई थी, इसलिए इस बार भी सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। अगले 48 घंटे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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