US-Iran Tension
US-Iran Tension : अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच 40 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद, इस्लामाबाद शांति वार्ता में किसी ठोस समझौते पर न पहुँच पाना दुनिया के लिए भारी पड़ रहा है। वार्ता की विफलता के बाद अमेरिका द्वारा की गई नाकेबंदी ने अब एक हिंसक मोड़ ले लिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्ष किसी एक बिंदु पर सहमत नहीं हो सके। इस गतिरोध के बाद वाशिंगटन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य नाकेबंदी (Naval Blockade) लागू कर दी। ईरान समेत कई क्षेत्रीय शक्तियों ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया, परंतु अमेरिका अपने फैसले से टस से मस नहीं हुआ। इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना और उसके निर्यात मार्ग को बाधित करना है।
तनाव तब चरम पर पहुँच गया जब अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसने अरब सागर में ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज ‘TOUSKA’ को अपने कब्जे में ले लिया है। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था। फ्लोरिडा स्थित मुख्यालय से जारी बयान के अनुसार, 19 अप्रैल को निर्देशित मिसाइल विध्वंसक USS स्प्राउंस ने इस पोत को उस समय रोका जब वह ईरानी बंदरगाह ‘बंदर अब्बास’ की ओर बढ़ रहा था। अमेरिकी सेना ने इसे एक वैध सैन्य कार्रवाई करार दिया है।
अपने जहाज पर कब्जे और सैनिकों की तैनाती से भड़के ईरान ने तत्काल सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ओमान सागर में मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाकर कई ड्रोन हमले किए हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी समुद्री संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। ड्रोन हमलों की इस खबर ने क्षेत्र में तैनात अन्य विदेशी नौसेनाओं के बीच भी हड़कंप मचा दिया है।
ईरान की सरकारी मीडिया ‘तसनीम’ ने सैन्य मुख्यालय ‘हजरत खातम अल-अनबिया’ के हवाले से अमेरिका की इस कार्रवाई को ‘सशस्त्र डकैती’ करार दिया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिकी “आतंकवादी सैनिकों” ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उनके वाणिज्यिक जहाज पर गोलीबारी की और जबरन डेक पर उतरकर नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है कि इस्लामिक रिपब्लिक के सशस्त्र बल इस “अमेरिकी डकैती” का बहुत जल्द और कड़ा जवाब देंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती यह सैन्य तकरार वैश्विक समुदाय के लिए चिंता का विषय है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग सकती है। जहाँ अमेरिका इसे अपनी सुरक्षा और नियमों का पालन बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला मान रहा है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि यह विवाद कूटनीतिक रास्ते पर लौटेगा या पूर्ण विकसित युद्ध में तब्दील हो जाएगा।
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