Terror Attack Warning : नई दिल्ली में भारत के लिए इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने आतंकवाद के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी आतंकी संगठन अपनी क्षमताओं को सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों की तुलना में तेजी से बढ़ा रहे हैं। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक देशों को इस खतरे से निपटने के लिए पहले से अधिक सतर्क और तेज रहना होगा।
आतंकियों से आगे रहने की जरूरत
इंडिया टुडे से बातचीत में रूवेन अजार ने कहा कि आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों और क्षमताओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से समय रहते रणनीति तैयार करने और आतंकवादियों से एक कदम आगे रहने की जरूरत बताई। अजार के अनुसार, भविष्य में कट्टरपंथी आतंकी हमलों की नई लहर का खतरा बना हुआ है।
हमास की गतिविधियों का दिया हवाला
इजरायली राजदूत ने आतंकवादी संगठनों के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर भी चिंता जताई। जब उनसे पूछा गया कि क्या अलग-अलग आतंकी संगठन पहले की तुलना में ज्यादा सहयोग कर रहे हैं, तो उन्होंने मध्य पूर्व के बाहर हमास की गतिविधियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, हमास से जुड़े लोगों की क्षेत्रीय गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश का जिक्र
अजार ने दावा किया कि पिछले एक साल के दौरान हमास से जुड़े कई वरिष्ठ कमांडरों को पाकिस्तान और बांग्लादेश में देखा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ हमास नेताओं की मौजूदगी ऐसे कार्यक्रमों में भी देखी गई, जिनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से बताया गया है। इन दावों को लेकर सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी महत्वपूर्ण बन जाती है।
आतंकी संगठनों के बीच प्रशिक्षण का दावा
इजरायली राजदूत ने कथित खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि लश्कर-ए-तैयबा के कुछ कैडरों को हमास के ऑपरेशनल तरीकों से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उनका कहना है कि आतंकी संगठनों के बीच तकनीक, रणनीति और अनुभव साझा होने की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है।
पहलगाम हमले का भी किया जिक्र
अजार ने अपनी बात के दौरान 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि हमास की विचारधारा और गतिविधियों का असर क्षेत्र के दूसरे आतंकी संगठनों पर पड़ा है। उन्होंने पहलगाम हमले को इसी व्यापक प्रभाव से जोड़ते हुए कहा कि हमास से जुड़े लोगों की क्षेत्र में बैठकों और गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।
लोकतांत्रिक देशों को रणनीति बनाने की अपील
इजरायली राजदूत ने कहा कि कट्टरपंथी आतंकवाद को केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा और खुफिया रणनीति के जरिए चुनौती देने की जरूरत है। उन्होंने लोकतांत्रिक देशों से आतंकवाद के बदलते तौर-तरीकों को समझने और उनसे निपटने की क्षमता विकसित करने की अपील की।
फ्लाईदुबई घटना के बीच आया बयान
अजार की यह टिप्पणी फ्लाईदुबई विमान से जुड़ी एक गंभीर घटना की जांच के बीच सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक को-पायलट पर कॉकपिट में कैप्टन पर हमला करने और विमान का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश का आरोप है। घटना के दौरान विमान को तेल अवीव की ओर ले जाने और उसे नुकसान पहुंचाने की आशंका भी जताई गई।
कैप्टन स्मित मच्छार ने संभाला मोर्चा
इस घटना में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका अहम बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने स्थिति का मुकाबला किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद कुछ यात्री कॉकपिट में पहुंच सके और संदिग्ध को काबू में लेने में मदद मिली। घटना के बाद विमान सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती
रूवेन अजार की चेतावनी और फ्लाईदुबई घटना ने विमानन सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर बहस को फिर तेज कर दिया है। हालांकि, आतंकी संगठनों के बीच कथित संबंधों और किसी घटना के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां ऐसे संभावित खतरों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
Read More : Weather Alert : मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट, 20 राज्यों में बारिश-आंधी; जानिए आपके शहर का हाल