Israel Election : इजरायल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज ने आगामी संसदीय चुनाव में हिस्सा नहीं लेने की घोषणा की है। उनकी पार्टी ब्लू एंड व्हाइट (काहोल लावान) जनमत सर्वेक्षणों में संसद में प्रवेश के लिए जरूरी न्यूनतम वोट हासिल करने में पिछड़ रही है। सोमवार, 20 अक्टूबर को गैंट्ज ने बताया कि वह 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनेंगे। हालांकि, उन्होंने राष्ट्रीय राजनीतिक एकता के लिए काम जारी रखने की बात कही है।
चुनाव में प्रवेश के लिए जरूरी 3.25 प्रतिशत वोट
इजरायल की संसद नेसेट में प्रवेश करने के लिए किसी राजनीतिक दल को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी है। नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। चुनाव से पहले जारी कई जनमत सर्वेक्षणों में गैंट्ज की पार्टी इस न्यूनतम सीमा से नीचे दिखाई दी है। लगातार कमजोर प्रदर्शन के कारण चुनावी मुकाबले से पीछे हटने का उनका फैसला इजरायल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कभी इजरायल के प्रमुख विपक्षी नेताओं में शामिल थे गैंट्ज
बेनी गैंट्ज इजरायल की राजनीति में एक समय प्रमुख विपक्षी नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने 2020 से 2021 तक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ राष्ट्रीय एकता सरकार में भी काम किया था। उस समय राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं का एक साथ सरकार चलाना इजरायल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया था।
हमास के हमले के बाद युद्धकालीन मंत्रिमंडल में हुए शामिल
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में दक्षिणी इजरायल पर हुए हमले के बाद गैंट्ज युद्धकालीन मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे। इस मंत्रिमंडल का गठन गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान से जुड़े फैसले लेने के लिए किया गया था। हालांकि, समय के साथ नेतन्याहू के साथ उनके मतभेद बढ़ते गए और जून 2024 की शुरुआत में उन्होंने आपातकालीन मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।
नेतन्याहू पर लगाए थे वास्तविक जीत में बाधा डालने के आरोप
मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते समय गैंट्ज ने आरोप लगाया था कि नेतन्याहू वास्तविक जीत की दिशा में आगे बढ़ने में बाधा पैदा कर रहे हैं। उनके इस्तीफे को युद्ध की रणनीति और सरकार के फैसलों को लेकर बढ़ते राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर देखा गया था। अब चुनाव से हटने के फैसले ने उनके राजनीतिक भविष्य और उनकी पार्टी की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक एकता के संदेश पर उठे सवाल
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकृत पश्चिमी तट के रामल्लाह से रिपोर्टिंग करते हुए संवाददाता नूर ओदेह ने कहा कि गैंट्ज का चुनावी दौड़ से हटना कई लोगों के लिए अप्रत्याशित था। हालांकि, 2018 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद से उनके राजनीतिक फैसलों को देखने वाले कुछ लोगों को इसमें निरंतरता नजर आ सकती है। गैंट्ज पहले भी उन नेताओं के साथ एकता सरकार बनाने के पक्ष में रहे हैं, जिनका उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध किया था। इनमें नेतन्याहू भी शामिल हैं।
फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व को लेकर एकता की राजनीति पर बहस
रिपोर्ट के अनुसार, गैंट्ज की राजनीतिक एकता की अपील मुख्य रूप से यहूदी राष्ट्रवादी दलों के बीच सहयोग तक सीमित रही है। आलोचकों का कहना है कि उनकी इस सोच में इजरायल के फिलिस्तीनी मूल के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों या गैर-यहूदी राष्ट्रवादी दलों को सरकार में शामिल करने की संभावना सीमित दिखाई देती है। इस वजह से उनकी एकता की राजनीति पर सवाल उठते रहे हैं।
चुनाव से हटने के बाद इजरायली राजनीति में क्या बदलेगा?
गैंट्ज के चुनाव नहीं लड़ने से आगामी मतदान में उनकी पार्टी की भूमिका और संभावित राजनीतिक गठबंधनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, केवल जनमत सर्वेक्षणों के आधार पर चुनाव के अंतिम परिणाम या किसी गठबंधन की सफलता का अनुमान निश्चित रूप से नहीं लगाया जा सकता। गैंट्ज ने राष्ट्रीय एकता के लिए काम जारी रखने की बात कही है, लेकिन उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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