Israel Iran Conflict : :इजराइल और ईरान के बीच हालात सामान्य नहीं हैं और अब यह टकराव एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका दौरे से लौटने के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को खुला अल्टीमेटम दिया है। नेतन्याहू ने दो महीने की मोहलत दी है, जिसमें ईरान को अमेरिका के साथ परमाणु समझौता करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो नेतन्याहू का कहना है कि अमेरिका और इजराइल मिलकर ऐसा हमला करेंगे जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
नेतन्याहू और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर टिकी हैं। यह सवाल अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गूंज रहा है कि क्या ईरान कूटनीति से पीछे हटेगा या फिर युद्ध की दिशा में बढ़ेगा? ईरान द्वारा संवर्धित यूरेनियम के भंडार और इसके परमाणु ठिकानों को लेकर इजराइल और अमेरिका बेहद चिंतित हैं। सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप के कहने पर ईरान को 60 दिनों की अंतिम चेतावनी दी है, जिसके तहत उसे 11 सितंबर 2025 तक फैसला लेना है।
नेतन्याहू ने ईरान को स्पष्ट रूप से 11 सितंबर तक की समयसीमा दी है। इस समय के भीतर ईरान को अपनी परमाणु क्षमता समाप्त करनी होगी और अमेरिका के साथ समझौता करना होगा। नेतन्याहू और ट्रंप पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि वे किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देंगे। उनका मानना है कि अगर ईरान परमाणु शक्ति बना तो इससे अरब देशों का रणनीतिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस चेतावनी को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ने ईरान पर पहले हमला कर गलती की है और अब अगर वाकई बातचीत चाहता है तो उसे सबसे पहले अपनी गलती माननी होगी। लेकिन इन शर्तों को अमेरिका स्वीकार नहीं करने वाला। इससे साफ है कि आने वाले समय में कोई संधि या समझौता संभव नहीं दिख रहा।
अगर अगले दो महीने में डील नहीं हुई, तो अमेरिका और इजराइल के पास कई सैन्य विकल्प मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार
ये 5 संभावित विकल्प हो सकते हैं:
कूटनीतिक दबाव: वैश्विक मंचों से ईरान को अलग-थलग करना
खुफिया कार्रवाई: संवर्धित यूरेनियम के ठिकानों पर गुप्त हमले
हवाई हमले: अमेरिका के B-2 बॉम्बर्स द्वारा ईरानी परमाणु केंद्रों पर बमबारी
ग्राउंड ऑपरेशन: इजरायली सेना द्वारा अंडरग्राउंड एटमी ठिकानों पर सीधा हमला
संयुक्त सैन्य अभियान: अमेरिका और इजराइल का साझा युद्ध अभियान
नेतन्याहू के बयान के बाद अब उनके रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज भी अमेरिका के दौरे पर जाने की तैयारी में हैं। उनका मकसद अमेरिकी प्रशासन को इस संयुक्त कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार करना है। नेतन्याहू का साफ कहना है कि ईरान सिर्फ इजराइल का नहीं, अमेरिका के लिए भी सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल अकेला देश है जो आज भी ईरान के सामने डटकर खड़ा है और उसे रोकने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि नेतन्याहू की धमकी के बावजूद इजरायली सैन्य अधिकारियों का मानना है कि ईरान का एटमी मिशन अब भी पूरी तरह सक्रिय और सुरक्षित है। इसका मतलब है कि पिछले महीनों में हुई कार्रवाइयों के बावजूद ईरान ने अपनी परमाणु प्रगति को नहीं रोका है। ऐसे में इजराइल और अमेरिका का मिशन अधूरा है और खतरा जस का तस बना हुआ है।
अगर सैन्य कार्रवाई होती है, तो ईरान की प्रतिक्रिया भी जबरदस्त हो सकती है। ईरान पहले भी इजराइल और अमेरिका को चेतावनी दे चुका है कि कोई भी हमला पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंक सकता है।
ईरान की तरफ से संभावित प्रतिक्रियाएं:
अमेरिका और इजराइल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला
हिज़्बुल्लाह और हूती विद्रोहियों के माध्यम से प्रतिरोध
स्ट्रेट ऑफ होरमुज में तेल यातायात को बाधित करना
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकीं, तनाव चरम पर
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस बढ़ते तनाव पर निगाह रखे हुए हैं। हालांकि फिलहाल कोई मध्यस्थता सफल नहीं हो सकी है।
सवाल यह है कि क्या यह विवाद कूटनीति से सुलझेगा या फिर मध्य-पूर्व एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर आ जाएगा?
अब सबकी निगाहें 11 सितंबर की समयसीमा पर टिकी हैं। ये दो महीने यह तय करेंगे कि ईरान परमाणु समझौते की तरफ बढ़ेगा या फिर अमेरिका और इजराइल के साथ टकराव की दिशा में जाएगा।एक ओर नेतन्याहू और ट्रंप ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए संकल्पित हैं, तो दूसरी ओर ईरान अपने अधिकारों और सुरक्षा से समझौता करने को तैयार नहीं। इन 60 दिनों में या तो शांति लौटेगी, या फिर युद्ध की चिंगारी भड़केगी।
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