Israel Syria airstrike : सीरिया की राजधानी दमिश्क में स्थित सैन्य मुख्यालय को बुधवार को इजराइल ने निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल-जज़ीरा ने बताया कि इस हमले में इजराइल ने दो ड्रोन से हमला किया। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक लाइव टीवी शो के दौरान बमबारी होते हुए दिख रही है। हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह लोकेशन वास्तव में मिलिट्री हेडक्वार्टर ही है या नहीं।
दमिश्क से दक्षिण की ओर स्थित स्वेदा प्रांत में बीते चार दिनों से शिया ड्रूज और सुन्नी बेदोइन समुदाय के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। अब तक इस संघर्ष में करीब 250 लोगों की जान जा चुकी है। हालात को देखते हुए इलाके में फौज की तैनाती की गई है, लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं आया है। संघर्ष की शुरुआत रविवार को हुई जब बेदोइन समुदाय के कुछ लोगों ने एक ड्रूज व्यक्ति पर हमला कर उसकी लूटपाट कर दी।इसके बाद ड्रूज मिलिशिया ने प्रतिक्रिया स्वरूप हथियार उठा लिए और बेदोइन गुटों से सीधी भिड़ंत शुरू हो गई।
जानकारी के मुताबिक, बेदोइन समुदाय के कुछ गुटों को सीरियाई सरकार समर्थक माना जाता है। ड्रूज नेताओं को संदेह था कि सरकारी सेना उनके खिलाफ इन गुटों का समर्थन कर रही है, जिससे संघर्ष और भी तीव्र और हिंसक हो गया। मंगलवार को संघर्षविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन बुधवार को फिर से हिंसा भड़क उठी। सरकार की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी और अपहरण की घटनाएं जारी रहीं।इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल भी सक्रिय हो गया और उसने स्वेदा के आसपास सीरियाई सेना के ठिकानों को एयरस्ट्राइक से निशाना बनाया।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान दिया कि उनका मकसद ड्रूज समुदाय की रक्षा करना है, जो इजराइल और गोलान हाइट्स में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीरियाई गृह मंत्रालय ने कहा कि यह संघर्ष सांप्रदायिक नहीं, बल्कि सरकार और अपराधी गुटों के बीच का है। सरकार ने माना कि स्वेदा में अराजकता को रोकने में वह नाकाम रही, लेकिन साथ ही ड्रूज समुदाय के साथ किसी विशेष टकराव से इनकार किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वेदा शहर में इंटरनेट और बिजली पूरी तरह बंद है।ड्रूज मिलिशिया ने इलाके में अपना मजबूत नियंत्रण बना रखा है, जो जॉर्डन सीमा और गोलान हाइट्स के बेहद पास है — एक रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र।दिसंबर में जब बशर अल-असद की सत्ता खत्म हुई और नई सरकार आई, तब उसने ड्रूज मिलिशिया से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय सेना में शामिल हो जाएं। लेकिन ड्रूज नेताओं को नई सरकार और राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (मोहम्मद अल-जुलानी) पर भरोसा नहीं है।
नई सरकार के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पहले एक इस्लामी विद्रोही संगठन के सदस्य थे, जिसे कभी अल-कायदा से जुड़ा माना जाता था। ड्रूज और अन्य धार्मिक-अल्पसंख्यक समुदायों को डर है कि नई सरकार उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इजराइल की दिलचस्पी के दो मुख्य कारण हैं -वह नहीं चाहता कि ईरान समर्थित या इजराइल विरोधी चरमपंथी गुट स्वेदा या अन्य सीमावर्ती इलाकों में अपना बेस बनाएं। इजराइल में मौजूद ड्रूज समुदाय, जो सरकार के करीबी हैं, उनकी चिंता को शांत करना चाहता है।इजराइल ने हाल ही में दक्षिणी सीरिया के उस बफर ज़ोन पर कब्जा कर लिया है, जहां पहले संयुक्त राष्ट्र की गश्त होती थी।
साथ ही इजराइली सेना अब दमिश्क के दक्षिण में घुसपैठ कर चुकी है और बीते महीनों में वह कई सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुकी है।
इजराइल का दावा है कि वह यह सुनिश्चित कर रहा है कि असद शासन के पुराने हथियार किसी आतंकवादी गुट या ईरान समर्थक दुश्मनों के हाथ न लगें।
इसीलिए वह अग्रिम कार्रवाई कर रहा है ताकि संभावित खतरे को पहले ही खत्म किया जा सके।इजराइली इतिहासकार इतामार राबिनोविच, जो 1990 के दशक में सीरिया-इजराइल शांति वार्ता का हिस्सा थे, कहते हैं “इजराइली सरकार कोई जोखिम नहीं ले सकती। वह नहीं चाहती कि गोलान हाइट्स के पास दुश्मन ताकतें जम जाएं और फिर ईरान या हिजबुल्लाह वहां कोई षड्यंत्र रचें।” यह संघर्ष अब सिर्फ सीरिया का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि एक क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का हिस्सा बन चुका है।ड्रूज समुदाय, ईरान समर्थक गुटों, नई सरकार और इजराइली रणनीति के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता को चुनौती दे सकता है।
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