Israel West Bank Policy
Israel West Bank Policy: मध्य पूर्व में जारी भारी उथल-पुथल के बीच एक नया रणनीतिक मोर्चा खुलता दिखाई दे रहा है। इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक क्षेत्र में लागू की गई नई विवादित जमीन नीति ने पड़ोसी देश जॉर्डन की रातों की नींद उड़ा दी है। अम्मान के राजनीतिक गलियारों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच यह आशंका गहरा गई है कि इजरायल एक सोची-समझी रणनीति के तहत फिलिस्तीनी आबादी को जॉर्डन की सीमा की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है। इजरायल के इस कदम को जॉर्डन अपनी संप्रभुता और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए एक अस्तित्वगत खतरे के रूप में देख रहा है।
इजरायली कैबिनेट ने हाल ही में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए वेस्ट बैंक की विशाल भूमि संपत्तियों को ‘राज्य भूमि’ (State Land) के रूप में पंजीकृत करने का आदेश दिया है। अब तक यह प्रक्रिया अलग नियमों के तहत होती थी, लेकिन अब इसे सीधे इजरायल के न्याय मंत्रालय के अधीन कर दिया गया है। इजरायल के कट्टरपंथी वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने इसे इजरायली बस्तियों के विस्तार के लिए एक ‘क्रांतिकारी कदम’ करार दिया है। जॉर्डन को मुख्य डर यह है कि इस नई कानूनी प्रक्रिया से वे पुराने उस्मानी (Ottoman) और जॉर्डन काल के भूमि दस्तावेज निष्प्रभावी हो जाएंगे, जो दशकों से फिलिस्तीनियों की संपत्तियों के एकमात्र कानूनी आधार रहे हैं।
जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियां केवल सीधे सैन्य युद्ध से नहीं, बल्कि ‘सॉफ्ट ट्रांसफर’ (Soft Transfer) की स्थिति से अधिक भयभीत हैं। इसका अर्थ है कि वेस्ट बैंक के भीतर फिलिस्तीनियों के लिए जीवन इतना कठिन बना दिया जाए कि वे स्वेच्छा से या मजबूरी में पलायन का रास्ता चुनें। जेनिन और तुल्कारेम जैसे संवेदनशील इलाकों में लगातार सैन्य रेड, आर्थिक नाकेबंदी और शरणार्थी कैंपों पर बढ़ते दबाव के कारण ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक और सुरक्षा कारणों से फिलिस्तीनी आबादी जॉर्डन की ओर पलायन करती है, तो यह अम्मान की आंतरिक सुरक्षा और संसाधनों पर असहनीय बोझ डाल देगा।
1994 में इजरायल और जॉर्डन के बीच हुई ऐतिहासिक ‘वादी अरबा शांति संधि’ अब तक इस क्षेत्र में स्थिरता का आधार रही है। हालांकि, मौजूदा इजरायली सरकार के कड़े रुख ने इस समझौते की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जॉर्डन का मानना है कि इजरायल अब दो-राष्ट्र सिद्धांत (Two-State Solution) को पूरी तरह दफन कर वेस्ट बैंक पर स्थायी कब्जा जमाना चाहता है। इसके जवाब में जॉर्डन ने भी अपनी रक्षात्मक स्थिति मजबूत कर ली है। करीब 35 वर्षों के बाद जॉर्डन ने अपने देश में ‘अनिवार्य सैन्य सेवा’ (Compulsory Military Service) को पुनः बहाल किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर युवाओं को सीमा सुरक्षा के लिए तैयार रखा जा सके।
जॉर्डन ने अपनी सीमाओं पर सतर्कता बढ़ाते हुए कुछ इलाकों को ‘बंद सैन्य क्षेत्र’ घोषित करने की योजना बनाई है। यह कदम किसी भी संभावित अनियंत्रित घुसपैठ को रोकने के लिए उठाया गया है। कूटनीतिक स्तर पर जॉर्डन अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहा है, ताकि इजरायल को उसकी विस्तारवादी नीतियों से रोका जा सके। यदि यह तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में इजरायल-जॉर्डन संबंधों में एक बड़ी दरार आ सकती है, जिसका असर पूरे मध्य पूर्व की शांति प्रक्रिया पर पड़ेगा।
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