Iran Italy Relations 2026
Iran Italy Relations 2026: ईरान और इटली के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक संबंध अब एक अत्यंत संवेदनशील और तनावपूर्ण दौर में पहुंच गए हैं। दोनों देशों के बीच कड़वाहट उस समय और बढ़ गई जब इटली ने यूरोपीय संघ (EU) के मंच पर ईरान की शक्तिशाली सैन्य शाखा ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस घटनाक्रम ने तेहरान को इस कदर नाराज कर दिया है कि उसने इटली के राजदूत को तलब कर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज कराई है। यह विवाद न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि मध्य पूर्व और यूरोप के बीच के भू-राजनीतिक समीकरणों को भी अस्थिर कर सकता है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इटली के राजदूत को मुख्यालय बुलाकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। तेहरान का मानना है कि इटली का वर्तमान रुख उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर सीधा हमला है। ईरानी अधिकारियों ने इटली के राजनयिक को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनके देश की सैन्य शाखा के खिलाफ किसी भी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ईरान ने इस कदम को पश्चिमी देशों की ‘शत्रुतापूर्ण नीति’ का हिस्सा करार दिया है और इसे अपने आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया है।
इस पूरे विवाद की जड़ इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी का वह हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने यूरोपीय संघ से IRGC को आधिकारिक तौर पर एक आतंकवादी संगठन घोषित करने का आह्वान किया है। ताजानी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस प्रस्ताव को ब्रुसेल्स में होने वाली यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक में पूरी मजबूती के साथ पेश करेंगे। इटली का तर्क है कि ईरान की यह सैन्य इकाई न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार है, बल्कि मानवाधिकारों के हनन में भी इसकी बड़ी भूमिका है।
इटली और अन्य मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ईरान में हाल के महीनों में हुए नागरिक विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए IRGC ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया है। मानवाधिकार संगठन ‘HRANA’ की रिपोर्टों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान लगभग 6,000 से अधिक आम नागरिकों की जान जा चुकी है। इटली सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों और दमनकारी नीतियों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय नजरअंदाज नहीं कर सकता। यही वजह है कि रोम अब तेहरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के पश्चिमी यूरोप मामलों के महानिदेशक ने इटली की इस पहल को ‘गलत और खतरनाक’ बताया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि यूरोपीय संघ ने इटली के दबाव में आकर IRGC को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया, तो इसके परिणाम वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति के लिए विनाशकारी होंगे। ईरान ने इटली से अपील की है कि वह यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाए और अपने इस ‘अनुचित’ रुख में सुधार करे, अन्यथा जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहे।
IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करना यूरोपीय संघ के लिए कानूनी और राजनीतिक रूप से एक जटिल प्रक्रिया है। EU के नियमों के अनुसार, किसी भी संस्था को आतंकी घोषित करने के लिए संघ के सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति (Consensus) अनिवार्य है। हालांकि कई देश इटली के प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कुछ सदस्य राष्ट्रों को डर है कि इससे ईरान के साथ परमाणु वार्ता के बचे-खुचे रास्ते भी बंद हो जाएंगे। फिलहाल, संघ ने ईरान पर ड्रोन और मिसाइल तकनीक के निर्यात को लेकर पहले ही कई कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं।
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