Middle East Crisis
Middle East Crisis : मिडल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इटली ने इजरायल के साथ अपने महत्वपूर्ण रक्षा समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरणों के आदान-प्रदान और रक्षा प्रौद्योगिकी अनुसंधान में गहन सहयोग किया जाता था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मंगलवार को इस कड़े कदम की घोषणा करते हुए साफ कर दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इजरायल के साथ सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाना अब संभव नहीं है।
इटली की प्रमुख समाचार एजेंसियों ‘ANSA’ और ‘AGI’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेरोना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस बड़े फैसले की पुष्टि की। मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मौजूदा युद्ध की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय संवेदनशीलता को देखते हुए, मेरी सरकार ने इजरायल के साथ रक्षा समझौते के स्वतः नवीनीकरण को रोकने का फैसला किया है।” एक इतालवी राजनयिक सूत्र ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि इस समय इजरायल के साथ सैन्य संबंधों को जारी रखना इटली के लिए राजनीतिक रूप से बेहद कठिन और जोखिम भरा होता।
ज्ञात हो कि इटली और इजरायल के बीच यह रक्षा समझौता साल 2005-2006 में हुआ था, जिसकी शर्तों के मुताबिक हर पांच साल में इसकी समीक्षा और नवीनीकरण किया जाता है। इस समझौते का दायरा काफी व्यापक था, जिसमें रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल, सैन्य कर्मियों की उच्च शिक्षा, सामरिक प्रशिक्षण, उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) और अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान शामिल था। इस समझौते के निलंबन से न केवल इजरायल की सैन्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, बल्कि दोनों देशों के दशकों पुराने रक्षा संबंधों में भी एक बड़ी दरार आ गई है।
इटली और इजरायल के बीच कूटनीतिक दरार पिछले सप्ताह तब और चौड़ी हो गई जब इतालवी सरकार ने इजरायली रक्षा बलों (IDF) पर गंभीर आरोप लगाए। इटली का दावा है कि लेबनान में तैनात इतालवी संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों (UNIFIL) के एक काफिले पर इजरायली सेना ने चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। हालांकि इस घटना में किसी सैनिक के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इटली के सैन्य वाहनों को नुकसान पहुँचा है। इस उकसावे वाली कार्रवाई के विरोध में इटली ने रोम में इजरायली राजदूत को तलब कर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराई थी।
सोमवार को तनाव उस समय अपने चरम पर पहुँच गया जब इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने लेबनान दौरे के दौरान इजरायल की कड़ी आलोचना की। ताजानी ने लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और विदेश मंत्री यूसुफ रागी से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वे “नागरिक आबादी के खिलाफ इजरायल के अस्वीकार्य हमलों के बाद इटली की एकजुटता व्यक्त करने” के लिए बेरूत आए हैं। इस बयान से तिलमिलाए इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए तेल अवीव में इतालवी राजदूत को तलब किया, जिससे साफ है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक युद्ध अब खुलकर सामने आ गया है।
इटली द्वारा रक्षा सहयोग रोकने का यह फैसला पूरे यूरोप के लिए एक बड़ा संकेत है। अब तक इजरायल के मजबूत सहयोगी रहे देश भी अब लेबनान और गाजा में हो रही सैन्य कार्रवाइयों के कारण अपने हाथ पीछे खींच रहे हैं। जॉर्जिया मेलोनी का यह कदम दर्शाता है कि इटली अपनी संप्रभुता और शांति सैनिकों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। यह निलंबन आने वाले समय में इजरायल के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य और कूटनीतिक अलगाव का कारण बन सकता है, जिससे मिडल ईस्ट के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
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