Jagannath Temple
Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर में नए साल के अवसर पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी 2026 को जगन्नाथ धाम में दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर के कपाट अपने निर्धारित समय से तीन घंटे पहले खोल दिए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्त सुगमता से महाप्रभु के दर्शन कर सकें और नए साल की शुरुआत आशीर्वाद के साथ करें।
सामान्य दिनों की तुलना में नए साल के अवसर पर पुरी में भक्तों की संख्या में तीन से चार गुना वृद्धि हो जाती है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए मंदिर अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी दी कि ‘न्यू ईयर ईव’ पर मंदिर को ज्यादा समय तक खुला रखा जाएगा। परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विश्राम के लिए मंदिर को केवल 3 घंटे के लिए ही बंद किया जाएगा। आमतौर पर मंदिर रात 11 बजे बंद होकर अगले दिन सुबह 5 बजे खुलता है, लेकिन इस विशेष अवसर पर मंदिर 1 जनवरी की सुबह 2 बजे ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस निर्णय पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि रथ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों की तरह नए साल पर भी भक्तों का रेला उमड़ता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दर्शन के समय में यह बदलाव मंदिर के पारंपरिक रीति-रिवाजों और गुप्त अनुष्ठानों को प्रभावित किए बिना किया जा रहा है। मंदिर के कपाट 31 दिसंबर की रात 11 बजे देवताओं के शयन (विश्राम) के लिए बंद किए जाएंगे और मात्र 3 घंटे के अंतराल के बाद, 1 जनवरी की सुबह 2 बजे मंगला आरती और अन्य अनुष्ठानों के साथ फिर से खोल दिए जाएंगे।
पुरी जिला प्रशासन और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने संयुक्त रूप से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों का जायजा लिया है। SJTA के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद बताया कि इस साल 1 जनवरी को पुरी में श्रद्धालुओं की संख्या 4 लाख के पार जाने का अनुमान है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मंदिर पूरी रात खुला नहीं रहेगा, लेकिन सुबह 2 बजे कपाट खुलने से कतारों में खड़े भक्तों को बड़ी राहत मिलेगी। सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस बल और वॉलिंटियर्स की तैनाती भी की जा रही है।
हालांकि, मंदिर प्रशासन के इस फैसले को लेकर कुछ भक्तों और सेवायतों के बीच मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं। कुछ पारंपरिक भक्तों ने अंग्रेजी नववर्ष के उपलक्ष्य में मंदिर की समय सारिणी में बदलाव करने पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि सदियों पुरानी परंपराओं को किसी आधुनिक उत्सव के आधार पर संशोधित नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर बड़ी संख्या में आम भक्तों ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि इससे घंटों लाइन में लगने वाली वृद्ध महिलाओं और बच्चों को कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
पुरी मंदिर प्रशासन का यह कदम यह दर्शाता है कि आधुनिक समय में बढ़ती भीड़ का प्रबंधन करना कितनी बड़ी चुनौती है। परंपराओं का सम्मान करते हुए भक्तों की सुविधा को प्राथमिकता देना ही इस फैसले का मुख्य आधार है। 1 जनवरी को सुबह 2 बजे से होने वाले दर्शन न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेंगे, बल्कि पुरी धाम की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी मजबूती देंगे। भक्तों से अपील की गई है कि वे अनुशासन बनाए रखें और मंदिर परिसर के नियमों का पालन करें।
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