Owaisi Pakistan Statement
Owaisi Pakistan Statement: रमजान के पवित्र महीने के आखिरी जुमे के अवसर पर हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में एक ऐसा राजनीतिक और धार्मिक संबोधन हुआ, जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। AIMIM के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में पड़ोसी देश पाकिस्तान पर अब तक का सबसे कड़ा हमला बोला। एक मुस्लिम नेतृत्वकर्ता द्वारा दूसरे मुस्लिम राष्ट्र की इतनी तीखी आलोचना विरले ही देखने को मिलती है। ओवैसी ने बिना किसी लाग-लपेट के पाकिस्तान की तुलना इजरायल से कर दी और उसे ‘इजरायल का छोटा भाई’ करार दिया। उनके इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद और निर्दोषों की हत्या के मामले में वे किसी भी देश को रियायत देने के पक्ष में नहीं हैं।
ओवैसी ने अपने संबोधन में तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह इजरायल अपने पड़ोसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है, ठीक वही भूमिका पाकिस्तान दक्षिण एशिया में निभा रहा है। उन्होंने गरजते हुए कहा, “ये हमारा पड़ोसी पाकिस्तान भी इजरायल का छोटा भाई है। ये दोनों ऐसे मुल्क हैं जो अपने पड़ोसियों को कभी चैन से रहने नहीं देंगे।” ओवैसी यहीं नहीं रुके, उन्होंने पाकिस्तान के ‘इस्लामिक कार्ड’ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जो देश बेगुनाहों का खून बहाता है, उसे इस्लाम की दुहाई देने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “तुमको इस्लाम का ‘अलिफ’ भी नहीं मालूम।”
ओवैसी के इस गुस्से के पीछे 16 मार्च को अफगानिस्तान के काबुल में हुआ वह भयावह हमला है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि पाकिस्तान ने काबुल में एक ड्रग पुनर्वास अस्पताल पर हवाई हमला किया, जिसमें तालिबान सरकार के दावों के अनुसार लगभग 400 लोगों की जान चली गई और 250 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल ‘सैन्य ठिकानों’ पर की गई कार्रवाई बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। एक अस्पताल जैसी जगह को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है, जिसने ओवैसी को यह सख्त रुख अपनाने पर मजबूर किया।
काबुल में हुए इस हमले के बाद का मंजर रूह कंपा देने वाला था। अफगान रेड क्रीसेंट के स्वयंसेवकों ने बारिश के बीच उन 400 पीड़ितों को अंतिम विदाई दी। लकड़ी के सादे ताबूतों में बंद उन लाशों को जब एक पहाड़ी पर खोदी गई सामूहिक कब्रों में दफन किया जा रहा था, तब पूरी दुनिया की खामोशी खल रही थी। ओवैसी ने इसी मानवीय त्रासदी का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दर्शाया कि कैसे एक तरफ शांति की बातें होती हैं और दूसरी तरफ मासूमों को मौत की नींद सुला दिया जाता है।
अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने भारत की विदेश नीति, विशेषकर पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के संघर्ष पर भारत के रुख की चर्चा की। ओवैसी का मानना है कि यदि भारत ने इस संघर्ष में पूरी तरह से निष्पक्ष और तटस्थ रुख अपनाया होता, तो आज वैश्विक स्तर पर भारत की आवाज में और अधिक वजन होता। उन्होंने वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की वकालत की।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईद के मौके पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा की है। हालांकि, पाकिस्तान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि सीमा पार से कोई भी उकसावा हुआ, तो वह अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक तीव्रता से शुरू करेगा। एक धार्मिक मंच से ओवैसी का यह कहना कि पाकिस्तान को “इस्लाम का अलिफ” नहीं पता, न केवल धार्मिक संदेश है बल्कि एक गंभीर राजनीतिक संकेत भी है।
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