Jagdalpur Central Jail : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित जगदलपुर केंद्रीय जेल एक बार फिर गंभीर विवादों और सुर्खियों में आ गई है। इस जेल परिसर के भीतर पिछले महज दस दिनों के भीतर तीन कैदियों की मौत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक के बाद एक हुई इन संदिग्ध मौतों ने जेल प्रशासन की पूरी कार्यप्रणाली, कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था और जेल के भीतर मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कैदियों के परिजनों में इस घटनाक्रम को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

जेल परिसर में एक महिला बंदी समेत तीन लोगों की हुई मौत
जगदलपुर केंद्रीय जेल में मौतों का यह सिलसिला मई महीने के आखिरी दिन से शुरू हुआ, जो जून के पहले सप्ताह तक लगातार जारी रहा। जेल से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दस दिनों के भीतर जिन तीन बंदियों की जान गई है, उनमें एक महिला कैदी भी शामिल है। इन लगातार होती घटनाओं के बाद जेल के भीतर भय और तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। प्रशासन अब इन सभी मामलों की प्रशासनिक और न्यायिक जांच कराने की बात कह रहा है।

कैदियों की मौत का पूरा घटनाक्रम और तारीखें
जेल के भीतर हुए इस पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा सिलसिलेवार तरीके से इस प्रकार है:
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पहली मौत (31 मई 2026): जेल में बंद एक महिला बंदी ने बैरक के भीतर कथित तौर पर सुसाइड (आत्महत्या) कर लिया, जिससे जेल की सुरक्षा में पहली बड़ी चूक सामने आई।
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दूसरी मौत (4 जून 2026): नक्सल मामलों में बंद एक विचाराधीन कैदी रमेश कुंजाम की बैरक के बाथरूम में अचानक गिरने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
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तीसरी मौत (7 जून 2026): जेल में बंद एक सजायाफ्ता बंदी सुधु कश्यप की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई।
सजायाफ्ता बंदी सुधु कश्यप की मौत का मुख्य कारण
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक कैदी सुधु कश्यप को अक्टूबर 2025 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) के तहत दोषी पाते हुए अदालत द्वारा सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह जेल में अपनी सजा काट रहा था कि अचानक 6 जून को जेल के भीतर उसकी तबीयत बेहद बिगड़ गई। जेल डॉक्टरों की सलाह पर उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए डिमरापाल स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उपचार के दौरान 7 जून को उसने दम तोड़ दिया।
बाथरूम में गिरने से नक्सल मामले के कैदी रमेश कुंजाम की गई जान
सुधु कश्यप की मौत से ठीक तीन दिन पहले, यानी 4 जून को जेल के भीतर एक और बड़ी घटना घटी थी। नक्सली गतिविधियों और प्रकरणों में संलिप्तता के आरोप में जेल में बंद विचाराधीन कैदी रमेश कुंजाम की बैरक के शौचालय में गिरने के कारण मौत हो गई थी। जेल प्रबंधन का कहना है कि रमेश बाथरूम में पैर फिसलने के कारण गिर गया था, जिससे उसे अंदरूनी चोटें आईं। हालांकि, कैदियों के मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस थ्योरी पर संदेह जताया है।

लगातार हो रही मौतों से कटघरे में जेल प्रबंधन की कार्यशैली
इस केंद्रीय जेल में महज दस दिन के भीतर एक महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने, एक कैदी के बाथरूम में गिरने और एक अन्य की इलाज के दौरान मौत होने की इन लगातार घटनाओं ने जेल मैनुअल और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। अंचल के प्रबुद्ध नागरिकों और कानूनविदों का कहना है कि इतनी सुरक्षित मानी जाने वाली केंद्रीय जेल के भीतर कैदियों की बुनियादी सेहत और उनकी मानसिक स्थिति की निगरानी क्यों नहीं की जा रही थी? इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है ताकि मौतों के असली कारणों का खुलासा हो सके।












