Caste Census Row
Caste Census Row: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जाति जनगणना के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने की साजिश रच रही है और महिला आरक्षण कानून के तकनीकी पहलुओं में बदलाव कर देश की जनता को गुमराह कर रही है। रमेश के अनुसार, सरकार के दावों और उनकी जमीनी कार्रवाई के बीच एक बड़ा विरोधाभास नजर आ रहा है, जो उनके छिपे हुए राजनीतिक एजेंडे की ओर इशारा करता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी बात रखते हुए जयराम रमेश ने कहा कि सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन का प्रस्ताव ला रही है। सरकार का तर्क है कि जाति जनगणना एक जटिल प्रक्रिया है और इसके परिणाम आने में काफी समय लगेगा, इसलिए महिला आरक्षण को इससे अलग करना जरूरी है। हालांकि, रमेश ने सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन राज्यों ने मात्र छह महीने के भीतर सफलतापूर्वक जाति आधारित सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, तो फिर केंद्र सरकार को इसमें वर्षों का समय क्यों लग रहा है?
जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार का असली मकसद जाति जनगणना कराना ही नहीं है। उन्होंने समझाया कि सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में इसे जनगणना और परिसीमन (Delimitation) के बाद लागू करने का प्रावधान था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग करने की कोशिश कर रही है ताकि वह जनगणना कराए बिना ही राजनीतिक लाभ लेने के लिए इसे लागू कर सके। रमेश के अनुसार, यह उस सर्वसम्मति का अपमान है जो संसद में इस बिल को पारित करते समय बनी थी।
कांग्रेस महासचिव ने अपने पोस्ट में सरकार की विश्वसनीयता पर चार प्रमुख सवाल उठाए हैं:
दोहरा मापदंड: जुलाई 2021 में सरकार ने लोकसभा और फिर सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वे SC/ST के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं करेंगे। अब अचानक उनकी सोच कैसे बदल गई?
अर्बन नक्सली कमेंट: प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2024 में जाति जनगणना की मांग करने वालों को ‘अर्बन नक्सली’ कहा था, फिर अप्रैल 2025 में सरकार ने जनगणना में इसे शामिल करने की घोषणा क्यों की?
डिजिटल डेटा और देरी: 30 मार्च 2026 को जनगणना आयुक्त ने कहा था कि प्रक्रिया डिजिटल होने के कारण 2027 तक नतीजे आ जाएंगे। अब सरकार नतीजों में देरी का बहाना क्यों बना रही है?
संसदीय मर्यादा: 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रावधानों में अब संशोधन की जरूरत क्यों पड़ रही है?
यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब 16 से 18 अप्रैल 2026 के बीच संसद का एक विशेष सत्र प्रस्तावित है। चर्चा है कि इस सत्र में सरकार महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। यदि यह कानून इस सत्र में संशोधित होकर पारित होता है, तो यह 31 मार्च 2029 से प्रभावी होगा और 2029 के आम चुनावों में पहली बार महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। कांग्रेस का मानना है कि यह सब जाति जनगणना से बचने के लिए किया जा रहा है।
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