Jaishankar Russia visit : ट्रंप की नाराज़गी के बीच जयशंकर की रूस यात्रा, भारत ने फिर चुनी ‘मित्र’ की राह

Jaishankar Russia visit : अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देना जारी रखा है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर 20 और 21 अगस्त को रूस की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अहम बैठक कर सकते हैं।

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यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ युद्ध तेज़ हो गया है। अमेरिका ने हाल ही में रूस से तेल आयात करने को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगा दिया है। इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ बताया है।

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तेल पर टैरिफ, लेकिन रूस से रिश्तों पर असर नहीं

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने पहले भी स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा नीति देश की 1.4 अरब जनता की ज़रूरतों और वैश्विक बाज़ार की स्थिति को देखते हुए तय की जाती है। कई अन्य देश भी यही कर रहे हैं, फिर भी निशाना केवल भारत को बनाया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।”

डोभाल की पुतिन से मुलाकात के बाद जयशंकर की यात्रा

इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी रूस की यात्रा पर गए थे और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की थी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। अब विदेश मंत्री जयशंकर की यात्रा को उसी सिलसिले का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जयशंकर की यह यात्रा सिर्फ तेल व्यापार की चर्चा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय, और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय समूहों में सहयोग को लेकर भी बातचीत की संभावना है।

अमेरिका-भारत तनाव, लेकिन रूस के साथ संतुलन बरकरार

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में व्यापारिक तनाव बढ़ा है। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के प्रभाव को दर्शाता है, जो आज भी अमेरिका की आर्थिक रणनीति में झलकता है।

हालाँकि, भारत इस तनाव को सीधे अपने विदेश संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहता। जयशंकर की मास्को यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को लेकर प्रतिबद्ध है और वह वैश्विक दबावों के आगे झुकने वाला नहीं है।

अमेरिका के बढ़ते दबाव के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने गहरे रिश्तों को प्राथमिकता दी है। जयशंकर की रूस यात्रा से यह स्पष्ट संकेत गया है कि भारत, राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रूप से संचालित करता रहेगा।

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