Religious conversion : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक निजी घर में आयोजित की जा रही ‘चंगाई सभा’ को लेकर भारी बवाल मच गया। घटना की भनक लगते ही स्थानीय हिंदू संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। हिंदू संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि इस विशेष सभा की आड़ में अंधविश्वास फैलाया जा रहा था। उनका दावा है कि आसपास के सीधे-साधे और गरीब ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों के मुफ्त और चमत्कारी इलाज का झांसा देकर यहां बुलाया गया था, ताकि उनका धर्म परिवर्तन कराया जा सके।

अंधविश्वास का खेल
सभा के भीतर चल रहे घटनाक्रम को लेकर बताया गया कि वहां मौजूद लोगों को एक कथित ‘चमत्कारी पानी’ पिलाया जा रहा था। दावा किया जा रहा था कि इस पानी को पीने मात्र से ही इंसानी शरीर की सभी पुरानी और असाध्य बीमारियां पूरी तरह ठीक हो जाएंगी। इसके साथ ही, सभा में शामिल हुए स्त्री-पुरुषों और बच्चों के बीच ईसा मसीह के उपदेशों और पवित्र बाइबल से जुड़ी धार्मिक किताबें एवं साहित्य भी बड़े पैमाने पर बांटे जा रहे थे। संगठन का आरोप है कि इलाज के बहाने लोगों को गुमराह कर ईसाई धर्म का खुला प्रचार-प्रसार किया जा रहा था।

देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी
इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि सभा के दौरान बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोप है कि मंच संभाल रहे पास्टर ने हिंदू देवी-देवताओं को लेकर बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक बातें कहीं। पास्टर ने उपस्थित भीड़ से कथित तौर पर कहा कि उनके पारंपरिक भगवान कुछ नहीं कर सकते, जबकि ईसा मसीह का दिया हुआ मात्र दो घूंट पानी पीने से ही जीवन के सारे कष्ट और बीमारियां दूर हो जाएंगी। इस पूरे घटनाक्रम और विवादित भाषण का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
उदयबंद गांव का पूरा मामला
घटनाक्रम के विस्तृत विवरण के अनुसार, यह पूरा वाकया गुरुवार की सुबह सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम उदयबंद के गुड़ीपारा इलाके का है। यहां बद्रीनाथ बरेठ नामक व्यक्ति के मकान के भीतर इस चंगाई सभा का बड़े पैमाने पर आयोजन किया गया था, जिसमें गांव की कई महिलाएं और पुरुष शामिल हुए थे। इस गतिविधि की गुप्त सूचना हिंदू जागरण मंच के जिला पदाधिकारी सतीश सोनी को मिली। जानकारी मिलते ही सतीश सोनी अपने कार्यकर्ताओं की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर मतांतरण कराने के इस कथित प्रयास का भंडाफोड़ कर दिया।
पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज
सतीश सोनी ने पुलिस प्रशासन को दी गई अपनी लिखित शिकायत में बताया कि उन्हें उनके एक परिचित ने इस अवैध सभा की लाइव जानकारी दी थी। मौके पर जाकर जब उन्होंने स्थिति देखी, तो वहां धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम चल रहा था। इसके बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कानून को हाथ में न लेते हुए सीधे सिटी कोतवाली थाने का रुख किया और पुलिस को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने तथा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले दोषियों पर तत्काल सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की।
पास्टर और मकान मालिक सलाखों के पीछे
हिंदू संगठन की लिखित रिपोर्ट और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर जांजगीर पुलिस ने बिना किसी देरी के त्वरित कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी पास्टर रथराम महिलांगे (उम्र 38 वर्ष) और सभा के लिए जगह मुहैया कराने वाले मकान मालिक बद्रीनाथ बरेठ (उम्र 40 वर्ष) को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत और गंभीर धारा 299 एवं 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
धार्मिक साहित्य जब्त
गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौके से भारी मात्रा में बांटे जा रहे आपत्तिजनक धार्मिक साहित्य, किताबें और अन्य संदिग्ध सामग्रियां विधिवत जब्त कर ली गई हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों का जिला अस्पताल में मुलाहजा कराने के बाद उन्हें स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहां से माननीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को जेल यानी न्यायिक रिमांड पर भेजने का आदेश दे दिया है। फिलहाल पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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