Jantar Mantar Protest: 13 FIR रद्द कराने SC पहुंची दिल्ली पुलिस, 2873 लोगों के क्रिमिनल रिकॉर्ड से मचा विवाद

जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR को रद्द कराने के लिए दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों की पहचान उनके आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर किए जाने की जानकारी दी थी। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर है।

Jantar Mantar Protest: दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2026 में जंतर-मंतर और उसके आसपास हुए CJP प्रदर्शन से जुड़े 13 मामलों को खत्म कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस ने यह अर्जी यशोवर्धन आजाद और अन्य की ओर से दायर याचिका में दाखिल की है। पुलिस का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से 25 जुलाई को लिए गए निर्णय के बाद इन FIR में आगे कार्रवाई जारी रखने की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर पुलिस ने अदालत से इन मामलों को समाप्त करने का अनुरोध किया है।

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21 से 26 जुलाई के बीच दर्ज हुई थीं FIR

दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल अर्जी के साथ एक चार्ट भी प्रस्तुत किया गया है। इसमें बताया गया है कि प्रदर्शन से संबंधित 13 FIR अलग-अलग थानों में 21, 22, 25 और 26 जुलाई को दर्ज की गई थीं। इन मामलों में प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा, दंगा, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। एक मामले में लूट से संबंधित आरोप भी दर्ज किया गया था।

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13 मामलों में अब आगे कार्रवाई नहीं चाहती पुलिस

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वह इन 13 FIR में आगे की कार्रवाई नहीं करना चाहती। पुलिस ने अदालत से अनुरोध किया है कि इन मामलों को समाप्त करने की अनुमति दी जाए। साथ ही पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संबंधित घटनाओं के आधार पर इसके बाद कोई नई FIR दर्ज करने की उसकी मंशा नहीं है।

2873 लोगों को लेकर अलग जांच की मांग

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल बताए गए 2,873 लोगों को लेकर अलग मांग रखी है। पुलिस के अनुसार इन लोगों में ऐसे व्यक्ति शामिल हैं, जिनके नाम पहले के आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े होने की जानकारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों में मौजूद है। पुलिस का कहना है कि केवल पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन प्रदर्शन के दौरान उनकी संभावित भूमिका की जांच जरूरी है।

नई FIR में केवल भूमिका की होगी पड़ताल

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से 2,873 लोगों के संबंध में एक अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। प्रस्तावित जांच का दायरा सीमित रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि इनमें से किसी व्यक्ति की प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में वास्तविक भूमिका थी या नहीं। पुलिस ने इसे मौजूदा 13 FIR से अलग प्रक्रिया के रूप में अदालत के सामने रखा है।

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दूसरी FIR मिलने पर भी राहत का विरोध नहीं

दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन घटनाओं से ये मामले संबंधित हैं, उनके संबंध में आगे नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। यदि इन्हीं घटनाओं को लेकर कोई अन्य FIR पहले से सामने आती है, तो प्रभावित पक्ष की ओर से समान राहत के लिए अदालत का रुख किए जाने पर पुलिस उसका विरोध नहीं करेगी। इससे पुलिस ने अपने अनुरोध की सीमा भी स्पष्ट करने की कोशिश की है।

अनुच्छेद 142 के तहत मांगी विशेष राहत

पुलिस ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 13 FIR रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही 2,873 लोगों से जुड़ी सीमित जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है। पुलिस का तर्क है कि दोनों मुद्दों को अलग-अलग रखते हुए अदालत उचित आदेश पारित करे, ताकि गंभीर आपराधिक भूमिका की स्थिति में जांच का रास्ता खुला रहे।

आदेश को भविष्य के मामलों की मिसाल न बनाया जाए

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि यदि अदालत इन मामलों में राहत देती है, तो उसका आदेश केवल मौजूदा मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित माना जाए। पुलिस चाहती है कि इस आदेश को भविष्य के दूसरे मामलों में सामान्य मिसाल के रूप में इस्तेमाल न किया जाए। इस तरह अर्जी में FIR समाप्त करने के साथ-साथ प्रस्तावित जांच की सीमा और कानूनी प्रभाव को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।

31 अगस्त को दाखिल हुई पुलिस की अर्जी

दिल्ली पुलिस ने यह अर्जी 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। इसके साथ दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त अजय कृष्ण शर्मा का हलफनामा भी संलग्न किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी कि 13 FIR को खत्म करने और 2,873 लोगों की संभावित भूमिका की अलग जांच को लेकर अदालत क्या आदेश देती है।

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