Jantar Mantar Protest News : दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किए जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार का यह निर्णय उन्हें मंजूर नहीं है और वह इसे मनमाना मानते हैं। दास के मुताबिक, जंतर-मंतर लंबे समय से लोगों के विरोध, असहमति और अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का एक प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में इसे प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
सौरव दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उठाए सवाल
CJP नेता सौरव दास ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “अस्वीकार्य। नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं?” दास ने पूछा कि क्या गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित करने से पहले देश के लोगों, संबंधित हितधारकों या किसी संगठन से सलाह ली थी। उन्होंने फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक विरोध के लिए महत्वपूर्ण स्थान को लेकर निर्णय लेने से पहले संबंधित पक्षों की राय ली जानी चाहिए थी।
‘लोगों से जंतर-मंतर छीना जा रहा है’, CJP नेता का आरोप
सौरव दास ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में कदम उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का अवसर छीना जा रहा है, उसी तरह भविष्य में लोकतंत्र को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। दास ने दावा किया कि यह फैसला सरकार की उसी दिशा में बढ़ते कदमों का हिस्सा है। हालांकि, लोकतंत्र को खत्म करने संबंधी उनकी टिप्पणी राजनीतिक आरोप है। इस पर सरकार की प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का दिया हवाला
CJP सह-संयोजक ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती। उनके अनुसार, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित करना लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के मौलिक अधिकार पर हमला है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम के बावजूद विरोध की आवाज को रोका नहीं जा सकेगा। दास ने अपने बयान में कहा, “अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन रहा है।” उनका यह संदेश विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर पार्टी के रुख को दर्शाता है।
दिल्ली पुलिस ने तीन नए प्रदर्शन स्थल किए निर्धारित
इस विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, पूर्वी दिल्ली के रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में शामिल किया गया है। आदेश के मुताबिक, जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल की सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, नए स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति और लागू शर्तों के बारे में संबंधित आधिकारिक निर्देश देखना जरूरी होगा।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
जंतर-मंतर को लेकर यह निर्णय ऐसे समय सामने आया है, जब राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के आह्वान के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की जानकारी दी गई है। इस फैसले ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों, प्रशासनिक नियंत्रण और नागरिक अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। जहां CJP ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है, वहीं नए निर्धारित स्थलों के जरिए विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन की व्यवस्था की गई है। अब इस मुद्दे पर आगे होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी।
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