Jantar Mantar Protest : दिल्ली के जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार को जंतर-मंतर से ज्यादा परेशानी लोगों की विरोध करने की आवाज से है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश की गई, तो देशभर में विरोध तेज हो सकता है। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे सीमित करने वाले फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
‘आज जंतर-मंतर, कल लोकतंत्र’, अभिजीत दीपके की टिप्पणी
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को अब प्रदर्शन स्थल नहीं माना जाएगा, क्योंकि इसे पहले ही संघर्ष का मैदान बना दिया गया है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने आशंका जताई कि आज जंतर-मंतर को सूची से हटाया गया है और कल लोकतंत्र को ही खत्म करने की कोशिश हो सकती है। दीपके ने कहा कि विरोध की आवाज दबाने की कोशिश जारी रही, तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। ये टिप्पणियां केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ उनके राजनीतिक विरोध को दर्शाती हैं।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान किए निर्धारित
जंतर-मंतर को लेकर विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी स्थायी आदेश के अनुसार, रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को प्रदर्शन स्थलों के रूप में तय किया गया है। इस फैसले के बाद जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की व्यवस्था को लेकर बहस तेज हुई है। हालांकि, नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन के लिए लागू शर्तों और अनुमति संबंधी नियमों की जानकारी आधिकारिक आदेश के आधार पर देखी जानी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया
अभिजीत दीपके ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने के दौरान उनके परिवार और वकील को उनके ठिकाने की जानकारी नहीं थी। दीपके ने दावा किया कि इस घटनाक्रम से उनके परिजनों को काफी परेशानी हुई। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है, इसलिए मामले के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
दादी के निधन की सूचना और पुलिस के वीडियो पर उठाए सवाल
दीपके ने अपनी दादी के निधन की जानकारी देने के पुलिस के तरीके पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पुलिस तड़के करीब साढ़े तीन बजे गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज लेकर आई और उनसे हस्ताक्षर करने को कहा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपने रिश्तेदार का नंबर निकालने तक की अनुमति नहीं दी गई। दीपके ने पुलिस की ओर से जारी वीडियो को एडिटेड बताते हुए पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को अपने वकील से बात करने का अधिकार है और उनके मामले में इस सुविधा को लेकर समस्या हुई।
वकील की मौजूदगी के बिना दस्तावेजों पर हस्ताक्षर से इनकार
अभिजीत दीपके के मुताबिक, पुलिस ने उनसे ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा, जो आंदोलन के जरिए शांति भंग नहीं करने से संबंधित थे। उन्होंने कथित तौर पर इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। दीपके ने कहा कि वह अपने वकील की मौजूदगी के बिना किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक, जब तक उन्हें तानाशाही खत्म होती दिखाई नहीं देती, तब तक वह विरोध करते रहेंगे।
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
दीपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के प्रमुख का बचाव करने के लिए सरकार नागरिकों के खिलाफ सख्ती कर रही है। उनके दावों के मुताबिक, युवाओं और पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है और दिल्ली पुलिस सांसदों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है। एक्स पर साझा पोस्ट में उन्होंने सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं कि उनके बचाव में सरकार को सभी के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ रहा है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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