Ambikapur News : अंबिकापुर में पीलिया के प्रकोप के बीच जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभावित वार्डों में निरीक्षण के दौरान रहवासियों ने आरोप लगाया कि टूटे हुए पाइपों को अस्थायी रूप से जोड़ने के लिए प्लास्टिक और पुराने रबर चप्पलों का इस्तेमाल किया गया। लोगों का कहना है कि इसी जगह से नालियों का दूषित पानी सप्लाई लाइन में प्रवेश कर गया, जिससे पेयजल संक्रमित हुआ और आसपास के घरों में सबसे अधिक मरीज सामने आए। रविवार को निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने प्रभावित वार्डों का दौरा कर जायजा लिया है।
बता दें शुक्रवार को पीलिया पीड़ित 42 मरीजों की पहचान होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चिंता और बढ़ गई है। प्रभावित मरीजों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने रविवार को प्रभावित वार्डों में पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने घर-घर जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। दौरे के दौरान मरीजों के उपचार की व्यवस्था की जानकारी ली गई और जरूरतमंद परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आरओ वाटर केन वितरित किए गए। मौके पर पार्षद हसन खान, पापिंदर सिंह, मो. इस्लाम, नियाजुद्दीन खान निक्की, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. अग्रवाल, अनिल पांडेय तथा नगर निगम जल शाखा के प्रभारी इंजीनियर प्रशांत खुल्लर सहित निगम और स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला एवं मितानिन कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जानकारी अनुसार, सोमवार से प्रभावित बस्तियों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों में खून की जांच कर संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। नगर निगम की टीम पेयजल के सैंपल लेकर जांच करेगी। साथ ही पाइपलाइन की मरम्मत और सुधार के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है।
दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए। वार्डवासियों का कहना है कि निगम कर्मियों ने टूटे पाइप को जोड़ने के लिए प्लास्टिक और पुराने रबर चप्पलों का इस्तेमाल किया। आशंका जताई जा रही है कि इसी स्थान से नालियों का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिलकर पेयजल को संक्रमित कर रहा है। जिस इलाके में यह शिकायत सामने आई, वहां आसपास के घरों में सबसे अधिक मरीज पाए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि नगर निगम के पास पाइपलाइन मरम्मत के लिए पर्याप्त और मानक सामग्री उपलब्ध नहीं है। यदि यह स्थिति सही पाई जाती है, तो यह लापरवाही संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकती है।
संभाग मुख्यालय में पीएचई के पास पेयजल में ई-कोली जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि सूरजपुर में यह जांच संभव है, जबकि यहां से सैंपल रायपुर भेजने की तैयारी की जा रही है। जिले में पानी में बैक्टीरिया जांच के लिए उपयोग होने वाला एच टू एस रैपिड किट भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों के लिए महज डेढ़ दर्जन के करीब एच टू एस बोतलें ही उपलब्ध कराई जा सकीं।
गौरतलब है कि शहर में पीलिया के प्रकोप का खुलासा भी स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने ही पेयजल सैंपल में ई-कोली बैक्टीरिया की पुष्टि की है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद निगम और स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला अलर्ट हुआ।
पीलिया के लगातार बढ़ते मामलों ने शहर में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित जांच, मरम्मत और स्वास्थ्य शिविरों से हालात पर कितनी तेजी से काबू पाया जा सकता है।
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