JDU Operation Clean
JDU Operation Clean: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (जो पिछले वर्ष संपन्न हुए) के परिणामों ने एनडीए (NDA) के पक्ष में एक जबरदस्त लहर दिखाई थी। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन ने कुल 243 सीटों में से 202 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया। इस जीत में भाजपा ने 89 और जेडीयू ने 85 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। हालांकि, इतनी बड़ी सफलता के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के भीतर असंतोष के स्वर दब नहीं रहे थे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि भीतरघात न हुआ होता, तो जेडीयू की सीटों का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था। इसी के मद्देनजर पार्टी ने अपनी कमियों को दूर करने और अनुशासन बहाल करने के लिए ‘ऑपरेशन क्लीन’ की शुरुआत की है।
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने शुक्रवार को एक आधिकारिक घोषणा करते हुए पार्टी के 12 प्रमुख नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन सभी नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों और एनडीए के अन्य सहयोगियों के खिलाफ काम किया। पार्टी ने अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाते हुए इन सभी को 6 साल की लंबी अवधि के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। निष्कासन पत्र पर उमेश कुशवाहा के हस्ताक्षर हैं, जो यह संकेत देता है कि यह फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीधी सहमति के बाद लिया गया है।
जेडीयू के भीतर इस कार्रवाई की नींव चुनाव परिणामों के तुरंत बाद ही रख दी गई थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव के दौरान मिली शिकायतों और अनुशासनहीनता के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने औरंगाबाद, सीवान, दरभंगा और जहानाबाद जैसे जिलों में जाकर जमीनी स्तर पर जांच की और आंतरिक रिपोर्ट पेश की। समिति के निष्कर्षों में पाया गया कि कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गुप्त रूप से विपक्षी दलों की मदद की या निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर पार्टी ने इन चेहरों को संगठन से बाहर निकालने की मंजूरी दी।
निष्कासित किए गए नेताओं की सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व विधायक अशोक सिंह का है, जो पार्टी के पुराने चेहरे माने जाते थे। इनके अलावा औरंगाबाद से संजीव कुमार सिंह, सहरसा से रामदास सदा और प्रिंस साहा, सीवान से संजय कुशवाहा और कमला दशहरा, तथा दरभंगा से अविनाश लाल देव का नाम शामिल है। जहानाबाद जिले में भी बड़ी कार्रवाई की गई है, जहाँ गोपाल शर्मा, महेंद्र सिंह, दास मुर्तजा शोधकर्ता और अमित कुमार पम्मू को बाहर किया गया है। इसके अलावा मो. जमीलुर्रहमान पर भी पार्टी की गाज गिरी है। ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव रखते थे, लेकिन पार्टी ने संदेश स्पष्ट कर दिया है कि संगठन से ऊपर कोई नहीं है।
जनवरी 2026 की शुरुआत में जेडीयू की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि नीतीश कुमार अब आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की राजनीति के लिए एक साफ-सुथरी और समर्पित टीम चाहते हैं। उमेश कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “गठबंधन धर्म का पालन करना हमारी प्राथमिकता है और जो लोग पीठ में छुरा घोंपते हैं, उनके लिए जेडीयू में कोई जगह नहीं है।” इस निष्कासन से राज्य की राजनीति में खलबली मच गई है, क्योंकि निष्कासित नेता अब नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश कर सकते हैं। वहीं, जेडीयू के इस कड़े कदम ने पार्टी के वर्तमान कार्यकर्ताओं को भी सतर्क रहने का कड़ा संदेश दे दिया है।
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