Rajya Sabha Election 2026
Rajya Sabha Election 2026: देश में राज्यसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक शतरंज की बिसात बिछ गई है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु एक बार फिर ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ का केंद्र बन गई है। कांग्रेस पार्टी को अपने खेमे में सेंधमारी और क्रॉस वोटिंग का गहरा डर सता रहा है, जिसके चलते उसने एहतियात के तौर पर अपने 12 विधायकों को बेंगलुरु के एक गुप्त रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है। ये विधायक कल देर रात बेंगलुरु पहुंचे, जहाँ उनकी सुरक्षा और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि विपक्षी दल प्रलोभन या दबाव के जरिए वोटों का गणित न बिगाड़ सकें।
इन विधायकों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक लग्जरी रिसॉर्ट में ठहराया गया है, जहाँ बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। कांग्रेस की रणनीति केवल इन्हें रिसॉर्ट तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि योजना के मुताबिक, इन विधायकों को 16 मार्च को मतदान के दिन सीधे भुवनेश्वर ले जाया जाएगा। पार्टी आलाकमान खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है। विधायकों के मोबाइल फोन के उपयोग और उनके बाहरी संपर्कों पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है ताकि मतदान से पहले किसी भी तरह की ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की गुंजाइश न रहे।
इस पूरे घटनाक्रम पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और संकटमोचक माने जाने वाले डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में इसे सामान्य बताया। शिवकुमार ने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से किसी को नहीं बुलाया है, लेकिन मुझे सूचित किया गया है कि वे यहाँ आए हैं। संबंधित पीसीसी (PCC) अध्यक्ष ने मुझसे संपर्क कर इंतजाम करने को कहा था।” दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इस सियासी हलचल को पर्यटन का रंग देते हुए कहा कि संभव है विधायक बेंगलुरु और मैसुरु घूमने आए हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होते ही वे इन विधायकों से मुलाकात करेंगे।
साल 2026 के राज्यसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और 10 राज्यों की कुल 37 सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इन सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना तय है। नामांकन की प्रक्रिया 5 मार्च को पूरी हो चुकी थी, जबकि 6 मार्च को नामांकनों की बारीकी से जांच की गई। नाम वापसी की अंतिम तिथि 9 मार्च थी। अब मुकाबला सीधे तौर पर चुनावी मैदान में है, जहाँ हर एक वोट की कीमत बढ़ गई है। विशेष रूप से उन राज्यों में जहाँ संख्या बल का अंतर बहुत कम है, वहाँ एक-एक विधायक की निष्ठा पार्टी के लिए निर्णायक साबित होगी।
विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कांग्रेस की इस कवायद ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। अपने विधायकों को एकजुट रखकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह विपक्षी दलों की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग यह तय करेगी कि कांग्रेस की यह ‘किलेबंदी’ कितनी सफल रहती है। फिलहाल, बेंगलुरु का यह रिसॉर्ट देश की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र बन गया है।
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