Jewel-Babbler
Jewel-Babbler : पापुआ न्यू गिनी के दुर्गम और घने रेनफॉरेस्ट एक बार फिर वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए कौतूहल का विषय बन गए हैं। जीवविज्ञानियों ने यहाँ ‘ज्वेल-बैबलर’ (Jewel-Babbler) परिवार की एक नई और दुर्लभ प्रजाति की खोज की है। यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए दुनिया भर में मशहूर है, जहाँ रूफस-नेप्ड बेलबर्ड और ब्लैक-हेडेड पिजन जैसे विलक्षण पक्षी पाए जाते हैं। नई प्रजाति की खोज ने यह साबित कर दिया है कि इन जंगलों की गहराइयों में अभी भी प्रकृति के कई रहस्य छिपे हुए हैं, जिनका सामने आना बाकी है।
ऑस्ट्रेलियन म्यूज़ियम रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी लेन वोक्सवोल्ड के अनुसार, ज्वेल-बैबलर मुख्य रूप से जमीन पर रहने वाले पक्षी हैं। इनका मुख्य आहार छोटे कीट-पतंगे होते हैं। इस प्रजाति का नाम ‘ज्वेल’ इसलिए पड़ा क्योंकि इनके पंखों का रंग किसी कीमती रत्न की तरह चमकदार और चटख होता है। ये पक्षी स्वभाव से अत्यंत शर्मीले होते हैं और इंसानी आहट मिलते ही घने पत्तों के पीछे छिप जाते हैं। हालाँकि, जंगल की खामोशी में इनकी मधुर आवाज़ स्पष्ट सुनी जा सकती है, लेकिन इन्हें प्रत्यक्ष रूप से देख पाना किसी दुर्लभ अनुभव से कम नहीं है।
पापुआ न्यू गिनी के जंगल केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि खतरों के लिए भी जाने जाते हैं। साल 2023 में यहाँ जहरीले पक्षियों की दो ऐसी प्रजातियाँ मिली थीं, जिनकी त्वचा और पंखों में घातक न्यूरोटॉक्सिन पाया जाता है। शोधकर्ताओं ने एक दिलचस्प खुलासा किया है कि ये पक्षी जन्मजात जहरीले नहीं होते। दरअसल, वे जिन जहरीले कीड़ों का शिकार करते हैं, उनके शरीर से जहर इकट्ठा कर अपनी त्वचा में समाहित कर लेते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यह जहर स्वयं इन पक्षियों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि शिकारियों से उनकी रक्षा करता है।
पापुआ न्यू गिनी को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक हॉटस्पॉट में गिना जाता है। अमेज़न और कांगो बेसिन के बाद, यहाँ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन मौजूद है। वैश्विक जैव विविधता का लगभग 5% से 7% हिस्सा अकेले इसी देश में पाया जाता है। यहाँ पक्षियों की लगभग 800 प्रजातियाँ निवास करती हैं, जिनमें दुनिया के सबसे खूबसूरत माने जाने वाले ‘बर्ड्स ऑफ़ पैराडाइज़’ भी शामिल हैं। ऊंचे पहाड़ों से लेकर कोरल रीफ़ तक फैला यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए शोध का स्वर्ग माना जाता है।
दुर्भाग्यवश, पापुआ न्यू गिनी की यह अद्वितीय प्राकृतिक विरासत आज बड़े संकट से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change), अवैध शिकार (Poaching) और वनों की कटाई ने कई दुर्लभ प्रजातियों को विलुप्ति की कगार पर पहुँचा दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन ने ‘नेशनल बायोडायवर्सिटी स्ट्रैटेजी और एक्शन प्लान 2025-2030’ पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य न केवल ज्वेल-बैबलर जैसी नई प्रजातियों का संरक्षण करना है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी है।
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