झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने आज बंद का आह्वान किया है। बंद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। JMM ने इसे बेअसर बताया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार मिलकर समस्या का समाधान निकालने के लिए तैयार है।
झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने आज बंद का आह्वान किया है। बंद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। JMM ने इसे बेअसर बताया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार मिलकर समस्या का समाधान निकालने के लिए तैयार है।

Jharkhand Bandh Today: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार, 10 अगस्त को राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे और विधानसभा घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उनकी प्रमुख मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी।

प्रदर्शनकारियों के विधानसभा की ओर बढ़ने के दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा किया गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने के बावजूद उनके खिलाफ बल प्रयोग किया गया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।

छात्र संगठनों की सबसे बड़ी मांग JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं को देखते हुए इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो चुके हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए विधानसभा घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया था।
आंदोलन के बीच रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई थी। सरकार ने छात्रों की कुछ महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार किया। बैठक में 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने पर सहमति बनी। इसके अलावा विवादित वेंडर एजेंसी TSR Data Processing Private Limited से जुड़ी पूर्व परीक्षाओं में कथित वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने का निर्णय भी लिया गया।
हालांकि JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार ने छात्रों को राहत नहीं दी। सरकार ने परीक्षा से जुड़े आरोपों की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। यही मुद्दा छात्रों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है और कथित गड़बड़ियों को देखते हुए परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार का कहना है कि छात्रों की कई प्रमुख मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं और सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है। सरकार ने आंदोलनकारियों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है। मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और अनियमितताओं से मुक्त बनाने के लिए व्यापक नीतिगत सुधार किए जाएंगे। इसके लिए विशेषज्ञों और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही गई है।
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो लगातार अनशन पर हैं। वार्ता के दौरान मंत्रियों ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की और भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की। हालांकि, छात्रों की मांगों को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं मिलने का हवाला देते हुए महतो ने फिलहाल अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है। उनके स्वास्थ्य को लेकर भी समर्थकों में चिंता बनी हुई है।
सरकार द्वारा नियुक्त समिति की ओर से आंदोलनकारी छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार किए जाने का दावा किया गया। इसके कुछ ही समय बाद छात्रों ने इस दावे को खारिज कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कुल 13 प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगों में सरकार ने केवल तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है। छात्रों ने इसे सरकार की ओर से जनता को भ्रमित करने का प्रयास बताया और अपने आंदोलन के लिए आम लोगों तथा राजनीतिक दलों से समर्थन मांगा।
विधानसभा के बाहर दिनभर चले प्रदर्शन के बाद देर रात पुलिस जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पर पहुंची। छात्र नेताओं के मुताबिक पुलिस प्रदर्शन में शामिल छात्रों की जानकारी जुटा रही थी और उनसे नाम तथा अन्य विवरण मांगे जा रहे थे। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारी छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव और बढ़ गया।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी ने मंगलवार, 11 अगस्त को राज्यव्यापी झारखंड बंद का आह्वान किया। प्रदेश बीजेपी ने इसे छात्रों के समर्थन और सरकार के खिलाफ विरोध का माध्यम बताया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अनुचित बल प्रयोग किया।
बीजेपी के बंद के ऐलान के बाद सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया। JMM ने बीजेपी के आंदोलन को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कहा कि बंद का राज्य में कोई खास असर नहीं होगा। पार्टी का कहना है कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रही है।
बंद के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता विभिन्न इलाकों में सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई स्थानों पर टायर जलाकर विरोध जताया गया। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में कार्यकर्ताओं ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई। इससे राज्य में छात्र आंदोलन अब सीधे राजनीतिक टकराव का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब झारखंड की सियासत का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सरकार वार्ता और सुधारों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने समेत अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। बीजेपी ने भी पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में आंदोलन, सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।
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