Jharkhand Maoist killed: झारखंड के गुमला ज़िले में सुरक्षा बलों को माओवादी विरोधी अभियान में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मंगलवार रात चंगाबाड़ी अपार्टाली इलाके में गुप्त सूचना के आधार पर अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में दोनों ओर से मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) का कमांडर मार्टिन केरकेट्टा मारा गया, जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम था।

हथियार बरामद, तीन माओवादी भागने में सफल
सुरक्षा बलों ने मृत माओवादी के पास से एक पिस्तौल सहित अन्य हथियार बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ के दौरान कुल चार माओवादी मौजूद थे, जिनमें से तीन अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। इलाके में अभी भी सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, केरकेट्टा की मौत से पीएलएफआई को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल था।

छत्तीसगढ़ में भी अभियान सफल
माओवादियों के खिलाफ एक और सफल अभियान छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में चला, जहाँ पुलिस बलों ने एक माओवादी को मार गिराया। यह मुठभेड़ जंगल क्षेत्र में तलाशी अभियान के दौरान हुई। मौके से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मृत माओवादी की शिनाख्त की जा रही है, और उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे।
मई 2026 तक माओवाद-मुक्त भारत का लक्ष्य
गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार ने मई 2026 तक देश को माओवाद से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसी के तहत देशभर में सघन अभियान चलाए जा रहे हैं। अकेले छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025 में अब तक 227 माओवादी मारे जा चुके हैं, जिनमें से 208 की मौत बस्तर रेंज में हुई है।
बस्तर रेंज में बीजापुर, बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे ज़िले शामिल हैं, जो माओवादी गतिविधियों के गढ़ माने जाते हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि लगातार हो रही सफलताओं से माओवादी नेटवर्क कमजोर हुआ है और ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल हो रही है। झारखंड और छत्तीसगढ़ में एक ही दिन में दो बड़ी माओवादी विरोधी कार्रवाइयाँ हुईं, जो सरकार के “माओवाद-मुक्त भारत” अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादियों के हौसले पस्त हो रहे हैं, और आम जनता में सुरक्षा का विश्वास बढ़ रहा है।










