Jharkhand Student Protest: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज होता नजर आ रहा है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने रविवार को राज्य सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाने के बावजूद सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के बाद मंच ने आंदोलन की रणनीति बदलने का संकेत दिया है।


मंच ने कहा- गांधी के रास्ते के बाद अब भगत सिंह की राह
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। मंच की ओर से कहा गया, “गांधी जी के रास्ते चलकर देख लिया, अब भगत सिंह बनते हैं।” इस बयान के जरिए आंदोलनकारियों ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदर्शन का स्वरूप और आक्रामक हो सकता है। हालांकि, आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष को छात्र हित और भर्ती प्रक्रिया में सुधार से जुड़ा बताया है।

18 अगस्त तक सरकार को दिया गया अल्टीमेटम
आंदोलनकारी छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि सरकार को 18 अगस्त तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन, भूख हड़ताल और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि अब आंदोलन को अगले चरण में ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की तैयारी
रविंद्र पासवान के मुताबिक, यदि 18 अगस्त तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होती है तो 20 अगस्त को बड़ी संख्या में छात्र और युवा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। मंच ने इस प्रदर्शन को व्यापक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
24 जिलों में पुतला दहन का कार्यक्रम
आंदोलन के अगले चरण के तहत मंच ने रविवार को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले फूंकने का कार्यक्रम घोषित किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने भर्ती परीक्षाओं से संबंधित उनकी मांगों और सुधार के प्रस्तावों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। इसी नाराजगी के चलते आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया है।

राहुल गांधी से समर्थन वापस लेने की मांग
आंदोलनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है। मंच का कहना है कि यदि झारखंड सरकार छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो राहुल गांधी को जेएमएम नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के प्रति कांग्रेस के समर्थन पर पुनर्विचार करना चाहिए। रविंद्र पासवान ने कहा कि कांग्रेस को युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग
छात्र संगठनों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही समस्याओं के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि सरकार को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, अनियमितताओं की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार करना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर निकाली गई तिरंगा यात्रा
इससे पहले शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची में आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली थी। यह यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाए और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया।
‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारे
तिरंगा यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ जैसे नारे लगाए। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। छात्रों का दावा है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार होने से लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी और सरकारी भर्तियों में उनका विश्वास मजबूत होगा।
अब 18 और 20 अगस्त पर टिकी नजरें
फिलहाल झारखंड के छात्र आंदोलन में 18 अगस्त की समयसीमा और 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार की ओर से इस अल्टीमेटम पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना अहम होगा। यदि मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता है तो आंदोलनकारी अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। इससे राज्य में भर्ती परीक्षाओं और युवा रोजगार से जुड़ा मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकता है।











